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आर्थिक तंगी ने रेखा को बनाया एक्ट्रेस,नहीं आना चाहती थीं फिल्मों में

भले रेखा इंडस्ट्री से दूर हो लेकिन अब भी वो इवेंट्स में भारी-भरकम साडिय़ों और कीमती ज्वैलरी में नजर आती हैं।

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Mahendra Yadav

Aug 02, 2018

Rekha

Rekha

रेखा को बी-टाउन इंडस्ट्री में एवरग्रीन ब्यूटी के रूप में जाना जाता है। रेखा बॉलीवुड की ऐसी एक्ट्रेस हैं जो प्रोफेशनल कॅरियर में तो काफी सक्सेसफुल रहीं लेकिन उनकी जिंदगी में उथल-पुथल रही है। रेखा का अभिनय में कोई इंट्रेस्ट नहीं था लेकिन आर्थिक तंगी होने की वजह से उन्होंने यह किया। यह उनके जीवन का कठिन समय था। रेखा के बारे में कई बातें और कई किस्से मशहूर हुए। भले रेखा इंडस्ट्री से दूर हो लेकिन अब भी वो इवेंट्स में भारी-भरकम साडिय़ों और कीमती ज्वैलरी में नजर आती हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री के तौर पर रेखा ने फिल्म 'सावन भादो' डेब्यू किया। वे अपने लुक्स को लेकर हमेशा चर्चा में रहीं और 1970 तक आते आते वे अभिनेत्री के रूप में स्थापित हो गईं।

फेमस फिल्में
सावन भादो, ऐलान, रामपुर का लक्ष्मण, धर्मा, कहानी किस्मत की, नमक हराम, प्राण जाए पर वचन ना जाए, धर्मात्मा, दो अंजाने, खून पसीना, गंगा की सौगंध, घर, मुकद्दर का सिकंदर, सुहाग, मिस्टर नटवरलाल, खूबसूरत, सिलसिला, उमराव जान, निशान, अगरर तुम ना होते, उत्यव, खून भरी मांग, इजाजत, बीवी हो तो ऐसी, भ्रष्टाचार, फूल बने अंगारे, खिलाडिय़ों का खिलाड़ी, आस्था, बुलंदी, जुबैदा, लज्जा, दिल है तुम्हारा, कोई मिल गया, कृष, सदियां, सुपर नानी, शमिताभ।

180 फिल्मों में किया अभिनय
रेखा ने अपने 40 सालों के लंबे कॅरियर में लगभग 180 से अधिक फिल्मों में काम किया है। अपने कॅरियर के दौरान उन्होंने कई दमदार रोल किए और कई मजबूत फीमेल किरदार को पर्दे पर बेहतरीन तरीके से पेश किया और मुख्यधारा के सिनेमा के अलावा उन्होंने कई आर्ट फिल्मों मे भी काम किया जिसे भारत में पैरलल सिनेमा कहा जाता हैै। उन्हें तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिल चुका है, दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का और एक बार सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री का जिसमें क्रमश: खूबसूरत, खून भरी मांग और खिलाडिय़ों का खिलाड़ी जैसी फिल्में शामिल हैं। उमराव जान के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। 2010 में रेखा भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया।

सिनेमा में शुरुआत
वे बाल कलाकार के तौर पर तेलगु फिल्म 'रंगुला रतलाम' में दिखाई दीं। कुछ दक्षिण भारतीय फिल्में करने के बाद रेखा ने बंबई की ओर रुख किया और हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया। बंबई उनके लिए एकदम नया था। सांवला रंग और लडख़ड़ाती हिंदी के कारण रेखा को मुंबई में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने फिल्म 'सावन भादो' (1970) के साथ आगाज किया और रातों रात मशहूर हो गईं।

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