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पहली ऐतिहासिक फिल्म में विनीत कुमार सिंह का जलवा, ‘छावा’ में कवि कलश बन रचा इतिहास

Chhaava Vineet Kumar Singh: शब्दों की तलवार और युद्ध का जुनून, 'छावा' में विनीत कुमार सिंह का प्रभावशाली प्रदर्शन। जानें क्यों खास है विनीत का अभिनय।

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Vineet Kumar Singh

Chhaava Vineet Kumar Singh: 'मुक्काबाज’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ फेम अभिनेता विनीत कुमार सिंह ने फिल्म छावा में कवि कलश के किरदार में अपने बेहतरीन अभिनय से जान डाल दी है। फिल्म में वो कवि कलश के किरदार में नजर आ रहे हैं, जो एक कवि और योद्धा दोनों हैं। इस किरदार में उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज के घनिष्ठ मित्र की भूमिका निभाई है।

कवि कलश, उत्तर भारतीय हैं , लेकिन मराठा साम्राज्य और अपने मित्र छत्रपति संभाजी महाराज के प्रति हर परिस्थिति में निष्ठावान रहते हैं। उत्तर भारत से होने के बाद भी वो छत्रपति संभाजी महाराज के सबसे भरोसेमंद साथी के रूप में खड़े हैं। उनका अपना अनोखा अंदाज और संभाजी महाराज से उनकी नजदीकियां, मराठा साम्राज्य में सभी को पसंद नहीं आती।

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बावजूद इसके, जब समय आया, तो उन्होंने मराठा साम्राज्य की आन, बान और शान को बनाए रखा और पूरी निष्ठा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संभाजी के साथ लड़े। वे चाहते तो ख़ुद को बचा सकते थे, लेकिन उन्होंने मराठा साम्राज्य, हिन्दवी स्वराज्य और अपने मित्र छत्रपति संभाजी महाराज का आख़िरी दम तक साथ नहीं छोड़ा।

विनीत कुमार सिंह की पहली ऐतिहासिक फिल्म


फिल्म में विनीत कुमार सिंह का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है। जब वह कविताएं पढ़ते हैं, तो उनके चेहरे पर सौम्यता और मुस्कान झलकती है, लेकिन वीर रस की कविताओं के दौरान उनकी आवाज में गर्जना और चेहरे पर जबरदस्त रौद्रता नजर आती है। कवि कलश के इस किरदार में विनीत पूरी तरह जान डाल दी है और ये उनके करियर की एक यादगार भूमिका बन सकती है।

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विनीत कुमार सिंह की फिल्में

ये विनीत कुमार सिंह की पहली ऐतिहासिक फिल्म है, लेकिन इसे देखकर ऐसा नहीं लगता कि वो पहली बार इस तरह के किरदार में आए हैं। इससे पहले भी वो अपने हर किरदार में पूरी तरह घुल-मिल जाते रहे हैं, चाहे वो ‘मुक्काबाज’ हो, ‘रंगबाज’ हो, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ हो, ‘अग्ली’ हो या ‘बॉम्बे टॉकीज’। हर बार वह एक नए इंसान की तरह नजर आते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

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कवि कलश की भूमिका में विनीत कुमार सिंह एक महान कवि की छाप तो छोड़ते ही हैं, उसके साथ ही साथ वो युद्ध के मैदान में भी अपना गजब का जलवा बिखेरते हैं। अगर फिल्म में कवि कलश को युद्ध करते हुए स्लो मोशन में शूट किया गया होता, तो कई दृश्य और भी प्रभावशाली बन सकते थे। इससे उनके किरदार की भव्यता के साथ ही छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश की जुगलबंदी और निखर सकती थी।

हर किरदार में ढल जाते हैं विनीत कुमार सिंह

विनीत कुमार सिंह पिछले 18-20 वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और हर बार नए किरदार में ढल जाते हैं। 'छावा' में भी उनके अभिनय में कहीं भी दोहराव नहीं दिखता, बल्कि यह एक नया और प्रभावी तरीके से विनीत कुमार सिंह अपनी छाप छोड़ते हैं।