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हिंदुस्तान और हमारी संस्कृति कहां है? अनुभव सिन्हा का बॉलीवुड पर सीधा वार, बोले-फेल हुआ सबकुछ

Why Audience Disappointed With Bollywood: अनुभव सिन्हा ने हाल ही में बॉलीवुड और भारतीय संस्कृति को लेकर एक गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान और हमारी संस्कृति की असली पहचान फिल्मों में सही ढंग से नहीं दिखाई जा रही है।

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हिंदुस्तान और हमारी संस्कृति कहां है? अनुभव सिन्हा का बॉलीवुड पर सीधा वार, बोले-फेल हुआ सबकुछ

अभिनव सिन्हा (सोर्स: mirchitushar and anubhavsinhaa के इंस्टाग्राम अकाउंट द्वारा)

Why Audience Disappointed With Bollywood: बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म 'अस्सी' के प्रमोशन के दौरान छोटे शहरों के दर्शकों से बातचीत कर बॉलीवुड को लेकर उनके विचार जाना। बता दें, अनुभव सिन्हा को समाजिक मुद्दों पर बेस्ड फिल्मों जैसे 'आर्टिकल 15' से लेकर साइंस फिक्शन फिल्म 'रा.वन' तक के लिए जाना जाता है, इस बार अनुभव डिजिटल कॉमेंट्री के साथ खास बातचीत में बोले कि आज के दर्शकों के मन में बॉलीवुड को लेकर कई तरह की शिकायतें हैं।

फिल्मों में म्यूजिक और कंटेंट क्रिएटर्स की कमी

अनुभव सिन्हा ने बताया कि वो इन दिनों देश के छोटे-छोटे शहरों का दौरा कर रहे हैं। वहां के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, स्थानीय दुकानदारों और आम जनता से मिलकर वो समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आज के दर्शक हमारी फिल्मों से क्या उम्मीद रखते हैं और उन्हें क्या पसंद नहीं आता।

इस पर डायरेक्टर ने बताया कि सबसे बड़ी शिकायत ये है कि आजकल की फिल्मों में म्यूजिक की कमी हो गई है और कई दर्शक अनुभव से पूछते हैं कि वे 'दस' जैसी लोकप्रिय फिल्म क्यों नहीं बनाते। अनुभव ने मजाक में कहा, "मैं उनसे कहता हूं कि मैं दस नहीं, ग्यारह फिल्म बना दूं, लेकिन हमारी कहानियां कहां हैं? इसीलिए ये सब फेल है" इस पर अनुभव सिन्हा ने कहा कि आज के दर्शकों को अपनी जिंदगी के अनुभवों और आसपास घटने वाली घटनाओं को पर्दे पर देखना है। छोटे शहरों के लोगों में ये भावना है कि उनकी दुनिया, उनकी संस्कृति और उनकी कहानियां बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों में क्यों नजर नहीं आतीं।

ब्रांड्स या ग्लैमर की तलाश

अनुभव ने आगे कहा, "लोग अब सिर्फ बड़े-बड़े ब्रांड्स या ग्लैमर की तलाश में नहीं हैं। डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स भी अच्छा पैसा कमा रहे हैं और अगर वे चाहेंगे तो बड़ी महंगी चीजें खरीद भी सकते हैं, लेकिन उनका सवाल ये है कि हिंदुस्तान की कहानी कौन कहेगा? हमारी संस्कृति को कौन दिखाएगा?"

इस बातचीत से एक साफ संदेश मिलता है कि बॉलीवुड को अब अपनी कहानियों को जनता के करीब लाना होगा, खासकर छोटे शहरों की वास्तविकताओं को पर्दे पर उतारने की जरूरत है। बता दें, आज के दर्शक सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी और संस्कृति की सच्ची झलक भी फिल्मी पर्दे पर देखना चाहते हैं।