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Bollywood Films: बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जिन्होंने सेक्स वर्कर्स के दर्दनाक जीवन को पर्दे पर दिखाया है। इन फिल्मों ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर क्यों महिलाओं को इस दलदल में धकेल दिया जाता है और उन्हें किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताने वाले है…
नागेश कुकुनूर द्वारा लिखित और निर्देशित ये फिल्म 13 साल की एक लड़की की त्रासदी को दर्शाती है, जिसे किडनैप करके बेच दिया जाता है और वो वेश्यावृत्ति के धंधे में आ जाती है। पहली बार वो अपने आस-पास की दुनिया की अमानवीयता का सामना करती है और धंधे का विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा जाता है। कुकुनूर को इस फिल्म की प्रेरणा एनजीओ के दौरे के दौरान मानव तस्करी पीड़ितों से मिलने के बाद मिली थी। यह फिल्म 21 मार्च 2014 को रिलीज हुई थी।
यह फिल्म एक लड़की की कहानी को दिखाती है, जो मुंबई में काम की तलाश में जाती है, क्योंकि वो नहीं चाहती कि उसकी छोटी बहन गरीबी से पीड़ित हो और अपनी शिक्षा पूरी न कर पाए। शहर में कई बाधाओं का सामना करने के बाद, वो अपनी परिस्थितियों से मजबूर होकर "नताशा" बनने के लिए मजबूर हो जाती है, जो एक एक्सक्लूसिव कॉल गर्ल है। कहानी बहुत दृढ़ता से दर्शाती है कि एक महिला को काम की तलाश करते समय किन-किन कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है और शहर की क्रूरता उसे कैसे वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल देती है।
करीना कपूर ने फिल्म में राहुल बोस के साथ लीड रोल में सेक्स वर्कर का किरदार निभाया है। चमेली, को उसके चाचा ने बचपन में एक वेश्यालय में बेच दिया था। फिल्म में चमेली की किरदार को एक मजबूत महिला के रूप में दिखाया गया है और उसके पास जीवन का एक मजबूत दर्शन है, जिससे वो फिल्म में राहुल बोस को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में सक्षम है। करीना को इस रोल के लिए फिल्मफेयर द्वारा बेस्ट परफॉर्मेंस का स्पेशल अवॉर्ड दिया गया था।
अपनी कहानी और निर्देशन के लिए बेहद प्रशंसित, देव डी कल्कि कोचलिन के किरदार के माध्यम से एक वेश्या का जीवन भी दिखाती है। जहां रातों के दौरान वो एक हाई प्रोफाइल एस्कॉर्ट चंदा होती है और दिनों के दौरान वो एक कॉलेज स्टूडेंट लेनी का किरदार निभाती है।
इस फिल्म में एक बच्ची के शोषण को दिखाया गया है। रेखा, जिन्होंने लीड रोल निभाया है। इसमें ये दिखाया है कि उनके पड़ोसी ने उन्हें किडनैप कर लिया और फिर एक वेश्यालय में बेच दिया। बता दें कि इन फिल्मों ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है और दिखाया है कि सेक्स वर्कर्स भी इंसान हैं और उनके साथ सम्मान से पेश आना चाहिए।
वेश्यावृत्ति पर बनी ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि पर्दे पर महिलाओं के उस दर्द को बयां करती हैं जो अक्सर अनसुना रह जाता है। इन फिल्मों में दिखाई गई पीड़ा, मजबूरी और संघर्ष आपको अंदर तक झकझोर कर रख देंगे।
Updated on:
8 Sep 2025, 4:29 PM IST
Published on:
8 Sep 2025, 2:27 PM IST
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