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नवजात बच्ची को कुंए में फेंका, ग्रामीणों की मदद से ले रही सांस

कुएं से नवजात की आ रही थी रोने की आवाज, गांव में हड़कंप
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बदायूं।नवरात्रि का माहौल था चारों तरफ देवी मां की पूजा हो रही थी। वहीं जैसे ही नवरात्रि समाप्त हुई एक परिवार की दरिंदगी सामने आई है। थाना वज़ीरगंज क्षेत्र के गांव वीरमपुर के गांव में एक कुंए में जिन्दा नवजात बच्ची मिली। बच्ची के मिलने की खबर से पूरे गांव में हड़कंप मच गया। गांव वालों ने नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां उसकी हालत स्थिर है। यह घटना रविवार की है।

ऐसे मिली जानकारी

रविवार की सुबह ग्रामीण गांव से होकर जा रहे थे कुएं से नवजात के रोने की आवाज आ रही थी। ग्रामीणों ने कुएं में देखा तो एक नवजात था। सभी ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और बच्ची को कुएं से निकाला। पुलिस ने पहले बच्ची को स्थानीय प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर उसकी तबीयत ख़राब होने लगी। उसके बाद बच्ची को महिला अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया। जहाँ पर बच्ची की हालत गंभीर होने के कारण उसे बरेली रेफर किया गया। बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

रविवार को हुआ जन्म

डॉ0 राजीव रोहतगी बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि बच्ची का जन्म रविवार को ही हुआ है। बच्ची को अंदरूनी चोटें हैं। जिसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है ।

साहस दिखाएं महिलाएं

वहीं इस इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना पर महिलाओं का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री बेटी बचाओ का नारा दे रहे हैं, लेकिन सामाजिक कुरीतियों और अशिक्षा के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसी घटनाएं रोकने के सामाजिक जागरूकता ज़रूरी है। दीपमाला गोयल ने कहा कि ऐसी महिलाओं को साहस दिखाना चाहिए। बच्ची को फेंकना नहीं चाहिए। जब देश में इसके लिए कई संस्थाएं काम कर रही है तो उन्हें दे देना चाहिए। बच्ची को फेंकना महिला के कमजोरी की निशानी है। फिलहाल मासूम बच्ची जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।