
बदायूं। सत्ता बदल गई मगर सिस्टम बदलता नहीं दिख रहा। सिस्टम में व्याप्त भृष्टाचार आज भी पहले की तरह दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। योगी सरकार के सभी सरकारी स्कूलों में फ्री ड्रेस देने के आदेश के बाद भी बच्चों को स्वयं कपड़ा खरीद कर ड्रेस सिलवानी पड़ रही है।
सीएम के आदेश की धज्जियां
दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि सभी सरकारी स्कूलों में बच्चों को फ्री ड्रेस दिया जाए, लेकिन स्कूलों में योगी सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस काम में बीएसए, एबीएसए और लोकल स्तर के नेता भी शामिल हो गए हैं। इन सभी की मदद से जिले के ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा विभाग की मिलीभगत से ठेकेदारों द्वारा ड्रेस भेजी जा रही हैं। जो न तो बच्चों की नाप की हैं और न ही अच्छी क्वालिटी की हैं।
शिक्षा माफिया और अधिकारिय़ों का गठजोड़
शिक्षा विभाग की मिलीभगत से ड्रेस माफिया ने जिले भर के ज्यादातर स्कूलों में अपनी मनमर्जी से ड्रेस सप्लाई करनी शुरू कर दी है। ड्रेस माफियाओं द्वारा स्कूलों को भेजी जा रही ड्रेस की न तो क्वालिटी ही अच्छी है और न ही ड्रेस बच्चों के नाप के अनुसार है। इन ड्रेस माफियाओं की शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सांठ गांठ है, जिस कारण से स्कूलों के प्रधानाचार्य पर शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने चहेते ठेकेदार से ड्रेस लेने का दबाव डालते हैं। बदायूं शहर के कुछ स्कूलों का रियल्टी चेक किया तो उन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों का कहना था कि उनके पास नगर संसाधन केंद्र, बदायूं के नगर समन्वयक सरवर अली का फोन आया था और उन्हीं के कहने पर विद्यालय में ड्रेस ली गयी हैं। वहीं उझानी ब्लॉक के एक स्कूल में जब हमने स्टिंग किया तब पता चला उस स्कूल में ठेकेदार ने ड्रेस सप्लाई नहीं की है।
प्रभारी मंत्री से भी की जा चुकी है शिकायत
वहीं इस संबंध में जब डीएम से बात की गई तो उनका हैरान करने वाला बयान सामने आया। डीएम अनीता श्रीवास्तव कहता हैं कि 400 रूपए में क्या ड्रेस मिल सकती है? डीएम कहती हैं कि यह संभव नहीं है कि स्कूल का टीचर जाए और वो बच्चो का ड्रेस सिलवाए। यह उनकी जिम्मेदरी भी नहीं है। डीएम कहती हैं कि किसी टीचर ने उनसे शिकायत नहीं की है। इसी महीने की 10 तारीख को प्रदेश सरकार के क़ानून मंत्री ब्रजेश पाठक के सामने भी इस मुद्दे को उठाया गया था तो उन्होंने किसी एक स्कूल के निरीक्षण करने और एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन उन्होंने न तो किसी स्कूल का निरीक्षण किया और न ही अभी तक कोई कार्रवाई ही हुई है।
क्य़ा कहना है बीएसए का
इस मामले में जब जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रेम चंद्र यादव से बात की गयी तो उनका कहना था कि जिले में 2.77 लाख बच्चों को ड्रेस का पैसा भेजा गया है 90 % बच्चों को ड्रेस बांट दी गई है। ड्रेस का पैसा विद्यालय में जाता है और विद्यालय ही ड्रेस खरीदता है। हालांकि उन्होंने शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों पर ड्रेस डलवाने के लिए दबाव डालने वाले नगर समन्वयक सरवर अली के खिलाफ जांच कराने की बात कही है ।
Published on:
16 Sept 2017 04:20 pm
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