
बुलंदशहर। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 51 बच्चों की मौत का मामला अभी जहन से उतरा भी नहीं था कि बुलंदशहर जिला महिला अस्पताल में प्रबंधन की लापरवाही से तीन बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। बता दें कि सोमवार को आंधी-बारिश के कारण बिजली की सप्लाई बाधित हुई तो एसएनसीयू में अंधेरा छा गया। बिजली ठप होने की वजह से अस्पताल में भर्ती दो नवजात बच्चों की मौत हो गई। वहीं, बुधवार सुबह भी एक बच्चे की मौत हो गई। सीएमओ का कहना है कि बच्चों की मौत का मुख्य कारण वजन कम और संक्रमण है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बिजली आपूर्ति पर लगे दो कर्मचारियों को हटाकर खानापूर्ति कर दी है।
ये था मामला
सोमवार रात नई मंडी चौकी क्षेत्र स्थित मुहाना निवासी यास्मीन पत्नी गुलजार और नरसेना के कमालपुर निवासी जमीला पत्नी मुश्ताक के नवजात बच्चे महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती थे। बताया गया है कि जिस दौरान बच्चे यूनिट में भर्ती किए गए। उस दौरान उनका स्वास्थ्य ठीक था। लेकिन देर रात बारिश के बाद महिला अस्पताल की बिजली गुल हो गई। सामान्यत: बिजली गुल होने पर जनरेटर से यूनिट में बिजली सप्लाई शुरू कर दी जाती है। लेकिन देर रात यूनिट में तैनात कर्मचारियों के कहने के बावजूद बिजली सप्लाई शुरू नहीं की गई। वार्म हीटर काम न करने से कुछ ही देर में दोनों शिशुओं की मौत हो गई। मंगलवार को मामला चर्चा में आया तो अफरातफरी मच गई। सीएमओ से शासन स्तर पर जवाब तलब किया गया। अफसरों ने खानापूर्ति करते हुए बिजली आपूर्ति करने वाले दो कर्मचारियों को हटा दिया। जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह बिरोंडी गांव निवासी कश्मीरा पत्नी ओमा के नवजात बच्चे की भी वार्म हीटर काम न करने की वजह से मौत हो गई।
एक माह में 12 नवजातों की हो चुकी है मौत
महिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं कि गत एक माह में 12 नवजात दम तोड़ चुके हैं। अस्पताल का स्टाफ परिजनो के सामने बच्चो की हालत खराब होने की बात कहकर अपना पीछा छुड़ा लेता हैं। रोते-बिलखते परिजन हंगामा कर परेशान होकर घर लौट जाते हैं। बता दें कि इससे पहले नवम्बर माह में एसएनसीयू में भर्ती हुए कुल 179 मासूमों में से चार मासूमों ने दम तोड़ दिया। जबकि आठ नवजात लेबर रुम में स्टाफ की लापरवाही के कारण जिंदगी की पहली जंग हार गए। बता दें कि सीएमओ ने इन सभी मामलों में सीएमएस को जांच के आदेश दिए हैं।
एसएनसीयू में तैनात हैं सीएमओ की रिश्तेदार
सीएमओ डा. केएन तिवारी की रिश्तेदार डा. शालिनी महिला अस्पताल में तैनात हैं। बताया गया कि डा. शालिनी और डा. श्यामानंद पर एसएनसीयू को संभालने की जिम्मेदारी है। रात में किसी की दिक्कत होने पर दोनो चिकित्सको को आनकॉल आना होता हैं। लेकिन रात में इतनी बड़ी दिक्कत हुई और कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा।
क्या कहते हैं सीएमओ
सीएमओ डा. केएन तिवारी का कहना है कि दो बच्चे अस्पताल से बाहर पैदा हुए थे और बहुत ही खराब हालत में अस्पताल में लाए गए थे। बच्चों की मौत का मुख्य कारण वजन कम और संक्रमण है। उनका वजन कम था, एक बच्चे का वजन 800 ग्राम तो दूसरे का 1200 ग्राम था। उनके परिजनों को भी इस बाबत अवगत कराया गया था। साथ ही सीएमओ ने बताया कि तीसरा बच्चा महिला अस्पताल में हुआ था और वो सातवां था। बताया कि बच्चे का वजन कम था और संक्रमक था। जिस वजह से उसकी भी मौत हो गई। बताया कि बिजली बाधित जरुर हुई थी लेकिन बच्चो की मौत की वजह बिजली नही हैं। साथ ही यह बताया कि बिजली बाधित होने पर कर्मचारी जनरेटर को थोड़ी देर से चालू करता है और रात में फोन रिसीव नहीं करता, जिस कारण कार्मचारी को हटा दिया गया है।
Published on:
13 Dec 2017 09:42 pm
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