
बुलंदशर. 3 दिसंबर 2018 को गोकशी के नाम पर हुए बवाल के मामले में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और एक बलवाई सुमत की जान चली गई थी। उसके बाद पुलिस ने 27 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज किया था। इसके अलावा 60 लोगों के खिलाफ अज्ञात में केस दर्ज किया गया था। उसके बाद वीडियो के आधार पर पुलिस ने बवाल कर रहे कुछ युवकों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में 40 लोग जेल से जमानत पर बाहर आ चुके हैं। बाकी चार लोग अब भी जेल में हैं। इसी क्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही लोकेश की जमानत की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने लोकेंद्र की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला जस्टिस यशवंत वर्मा की एकल पीठ ने सुनाया।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उस एफआईआर में उसका नाम जांच के दौरान बाद में जोड़ा गया। इसके अलावा उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था। अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत याचिका का इस आधार पर विरोध किया कि यह एक ऐसा मामला है, जहां एक बेकाबू भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला किया था और लोकेंद्र ने पुलिस अधिकारी की हत्या में प्रत्यक्ष भूमिका अदा की। बता दें कि दिसंबर 2018 में पुलिस निरीक्षक एसके सिंह के सिर में गोली मारी गई थी, जबकि पुलिस टीम ने हिंसक भीड़ से निपटने के दौरान एक प्रदर्शनकारी युवक की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम ने इस मामले में बजरंग दल, भाजपा और विहिप के नेताओं समेत 44 लोगों को आरोपी बनाया था और बाद में उन पर राजद्रोह के आरोप भी लगाए गए थे।
Published on:
04 Dec 2019 12:10 pm
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