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बुलंदशहर हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित को एक ही हथियार से मारी गई गोली!

बुलंदशहर हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित कुमार की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

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बुलंदशहर हिंसा में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और सुमित को एक ही हथियार से मारी गई गोली!

बुलंदशहर. बुलंदशहर हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और सुमित कुमार की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इंस्पेक्टर सुबोध और सुमित को .32 बोर के हथियार से गोली मारी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद में कई सवाल उठने लगे है। आंशका जताई जा रही है कि दोनों को एक ही हथियार से गोली मारी गई। यह हथियार लाइसेंसी है या फिर अवैध अभी साफ नहीं है। अभी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की लाइसेंसी रिवाल्वर भी गायब है। इस घटना में तभी साफ होगा जब उनकी लाइसेंसी रिवाल्वर मिलती है और उसकी फॉरेसिंक जांच होगी।

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दोनों को लगी है .32 की गोली

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों के शरीर से मिली गोली .32 बोर की गोली के बाद कुछ अहम सवाल खड़े हो गए है। ऐसे ही कुछ सवालों की पड़ताल करने में एसआईटी की टीम जुटी है। सवाल यह भी है कि .32 बोर के पिस्टल या रिवाल्वर का लाइसेंस लेने वाले लोगों को मिलता है। पुलिस के पास .38 बोर के हथियार होते है। आम लोगों के लिए यह हथियार प्रतिबंधित होता है। वहीं एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर आंनद कुमार के मुताबिक, जांच में आया है कि सुमित भीड़ में शामिल था। किसी गोली लगी है, इसकी जांच एसआईटी कर रही है। माना यह भी जा रही है कि अगर सुमित की जान बच जाती है तो हिंसा का आरोपी का खुलासा हो सकता था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ यह खुलासा

सुमित की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल के सुमित को सामने से गोली मारी गई है। गोली दिल से एक सेंटीमीटर नीचे लगी है। यह फेफड़ों को फाड़ती हुई अंदर जा घूसी। खून काफी बहने की वजह से दिमाग तक नहीं। जिसकी वजह से ब्रेन हेमरेज हो गया। गोली 1.1 से 1.4 सेंटीमीटर चौड़ी गोली ने दाएं हिस्से की हड्रिडयों को तोड़ा। उसके बाद में बाएं फेफड़ों में घुस गई। गोली ने शहरी के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचाया था। आंशका है कि गोली बेहद नजदीक से चलाई गई। हड्डी से गोली टकराने के बाद में शरीर के दूसरे हिस्से में गोली चली गई और कई अंगो को नुकसान पहुंचाया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ है कि जिस भी व्यक्ति ने सुमित को गोली मारी, वह उसके काफी करीब था।

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें एक गोली मारी गई थी। सिर में गोली का एक निशान मिला है। यह गोली उनके बाएं आंख की भौं में लगकर अंदर जा घूसी थी। बाद में पीछे की तरफ से जाकर सिर में फंस गई। इसका घाव एक सेमी से डेढ़ सेटीमीटर के बीच है। इसके अलावा शरीर पर पत्थर के लगने के भी चोटें आई है।

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अवैध असलहों का हुआ इस्तेमाल

दोनों की मौत में .32 बोर कैलिबर की गोली का इस्तेेमाल हुआ है। जिसके बाद में अवैध हथियार भी चर्चा में आ गए है। आंशका यह भी है कि हिंसा में कहीं अवैध कट्टे तो इस्तेमाल नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि हिंसा के दौरान अवैध कट्टे का इस्तेमाल हुआ है। दरअसल में इस दौरान कई राउंड गोलियां चली थी। यह खुलासा इंस्पेक्टर के ड्राइवर राम आसरे ने किया था।

वीएचपी के विभाग मंत्री गोपाल शर्मा के मुताबिक, सुमित को गोली लगने के बाद ही गोकशी को लेकर आक्रोशित लोग हिंसक हुए थे। एसआईटी इन सवालों के जवाब तलाश रही है कि गोकशी को लेकर भीड़ अचानक हिंसा पर क्यों उतर आई, इंस्पेक्टर सुबोध व सुमित को लगी गोली क्या एक ही हथियार से चली थी। दोनों के शरीर से .32 बोर की गोली एक ही हथियार की है।