1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली इस बेटी ने बिहार में जज बनकर यूपी का बढ़ाया मान

बुलंदशहर (Bulandshahar) के छोटे से कस्बे की बेटी ने किया यूपी में नाम रोशन बिहार पीसीएस-जे (Bihar PCS-J 2019) में 83वां स्थान प्राप्त की हिमशिखा ने सफलता के बाद घर पर बधाई देने वालों का लगा तांता

2 min read
Google source verification
bulandshahar.png

बुलंदशहर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बुलंदशहर (Bulandshahr) के छोटे से कस्बे जहांगीराबाद (Jahangirabad) से पढ़ी लिखी 28 वर्षीय हिमशिखा ने बिहार पीसीएस जे (Bihar PCS-J 2019) में 83वां स्थान पाकर जनपद और प्रदेश का नाम रोशन किया है। हिमशिखा का बिहार पीसीएसजे में 83वां स्थान आने पर उसके घर बधाई देने आने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। अपनी सफलता पर शिखा बताती हैं कि इसका श्रेय उनके मित्र, परिजन और माता-पिता के साथ-साथ बांके बिहारी जी को जाता है, जिनकी प्रेरणा से में इस स्थान पर पहुंच पाई हूं।

यह भी पढ़ें: संभल में रेप और हत्या की घटना से महिलाओं में फैला आक्रोश

बुलनंदशहर के जहांगीराबाद में जन्मी और पढ़ी हिमशिखा शुरू से ही पढ़ाई में अच्छी बताई जाती हैं। अपनी पढ़ाई पर हमेशा फोकस करने वाली और ध्यान देकर बच्चों से अलग हिमशिखा हमेशा पढ़ाई को ही तरजीह दिया कर दी थी। हिमशिखा ने हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई जहीगीराबाद से करने के बाद एलएलबी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से किया और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हॉस्टल से रहकर एलएलएम के साथ पीसीएसजे की तैयारी की।

यह भी पढ़ें: जनता एक्सप्रेस ट्रेन में हुई हत्या के आरोपी से खतरनाक हथियार हुआ बरामद

बिहार पीसीएसजे परीक्षा में 83वां स्थान पाने वाली हिम शिखा बताती हैं कि वह 7 से 8 घंटा लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई किया करती थी। लक्ष्य को निर्धारित करने में अधिक समय लगता था तो वह लक्ष्य को पूरा करने के बाद ही अपने अन्य काम किया करती थी। हिम शिखा का कहना है कि इंटरव्यू के टाइम पर उसके रूममेट्स ने उनका पूरा सहयोग किया और रूममेट्स ने इंटरव्यू की तैयारी कराई। साथ ही माता-पिता और अपने चाचा और चाची का भी अपनी सफलता में योगदान बताती हैं। वहीं, हिमशिखा के पिता धर्मेन्द्र मिश्रा अपनी बेटी की सफलता से खाफी खुश है। उनका कहना है कि मैं बया नहीं कर सकता हुं कि मैं कितना खुश हूं। साथ ही हिमशिखा सीधा-सीधा भगवान कृष्ण को इसका श्रेय देती है। वह चाहती हैं कि न्याय की कुर्सी पर बैठकर सभी के साथ समान न्याय हो।