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बुलंदशहर हिंसा के बीच इज्तिमा में मुसलमानों ने देश के लिए मांगी ऐसी दुआ, सुनकर आंखों से निकल आएंगे आंसू

अमन और शांति के लिए उठे हाथ, गुनाहों के लिए माफी मांगी

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Bulandshahar Ijtima

बुलंदशहर हिंसा के बीच इज्तिमा में मुसलमानों ने देश के लिए मांगी ऐसी दुआ, सुनकर आंखों से निकल आएंगे आंसू

बुलंदशहर. तीन दिसंबर को जहां देशभर में बुलंदशहर की चर्चा वहां बजरंगदल के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई खूनी संघर्ष की वजह से हो रही थी। वहीं, बुलंदशहर के दरियापुर में चल रहे आलमी अज्तिमा में लाखों मुसलमानों के हाथ अपने रब के सामने उठे हुए थे। उस दौरान मुसलमानों ने अपने पापों पर शर्मिंदी जताते हुए रो-रोकर अल्लाह से दुआएं की। दुनियाभर से लाखों की तादाद में पहुंचे मुसलमानों ने अपने ऊपर अल्लाह की कृपा (मेहरबानी) की दुआ के साथ ही देश और दुनिया के लिए अमन और शंति की दुआएं मांगी। कई किलो मीटर में फैले इस मौदान में या अल्लाह हम गुनाहगार, खतावार हैं तू अपनी रहमत से हमारे गुनाहों (पापों) को माफ फरमा। हमें बेहतरी के रास्ते पर चलते की तौफीक अता फरमा। या अल्लाह हम रास्ता भटक गए हैं, दीन (धर्म) से दूर हो गए हैं। हमें भलाई और नेकी के काम करने वाला बना दे जैसी सदाएं गूंती रही। इस दौरान अपने गुनाहों की माफी के लिए किसी की आंख से आंसू निकल पड़े तो कोई फूट-फूट कर रोने लगे। इस दौरान देश में राम मंदिर को लेकर गरमाती राजनीति और सांप्रदायिक तनाव को देखते हुए देश में अमन-शांति बनाए रखने और देश को तरक्की के रास्ते पर चलाने की दुआ की गई। तबलिगी जमात के मुखिया मौलाना साद साहब ने देश और दुनिया में अमन और शांति के पैगाम के लिए दुआ कराई।

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आलमी तब्लीगी इज्तिमा के तीसरे दिन सोमवार को लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो गया। सुबह से ही यहां पहुंचने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। जमातों के अलावा दोपहर से ही अधिकांश लोग पहुंच गए थे। मौलाना साअद साहब कांधलवी ने उन 6 बातों पर तफ्सील से बयान किए जिसके आधार पर इज्तिमा आयोजित होता है। नमाज, इल्म और जिक्र के साथ इन्होंने तालीम पर विशेष जोर दिया। वहीं, एक वक्ता मौलाना ने बयान कर लोगों को असल जिंदगी का मकसद अल्लाह के रास्ते पर चलने और भलाई के काम करते रहने की हिदायत दी।

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गौरतलब है कि तब्लीगी जमात पूरी तरह से अराजनीतिक संगठन है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ इकट्ठा होने के बावजूद यहां पर किसी को किसी तरह की राजनीतिक सलाह या हिदायत नहीं दी जाती है और न ही इस आयोजन के लिए सरकार से ही कोई मदद ली जाती है। इस जमात में सभी लोग अपने-अपने खर्चे पर जगह-जगह जाकर धर्म का प्रचार करते हैं। यह लोग अपने साथ बोरिया-बिस्तर के अलावा खाने पकाने का सामान भी लेकर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं।