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World Thalassemia Day: जानिए, क्या है थैलेसीमिया, लॉकडाउन में उखड़ रही बच्चों की सांसें

Highlights: -लॉकडाउन के कारण नहीं मिल रहा ब्लड व दवाई -प्रशासन और शासन से लोगों ने लगाई गुहार -बुलंदशहर में 100 से अधिक बच्चे हैं बीमारी के शिकार

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बुलंदशहर। देश मे लॉकडाउन (Lockdown) का ग्राफ जिस तरह बढ़ रहा है, वैसे ही थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सांसे उखड़ रही हैं। हालात यह हो चले हैं कि लॉकडाउन में थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों (thalassemia patients) को दवा और खून तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में थैलेसीमिया (thalassemia) पीड़ित इन बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। दरअसल, 8 मई का दिन दुनियाभर में वर्ल्ड थैलेसीमिया डे (world thalassemia) के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में हम आपको यूपी के बुलंदशहर में रहने वाले 100 से भी अधिक थैलेसीमिया की जद में बच्चों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें लॉकडाउन के चलते परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।

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डॉक्टरों के मुताबिक इस गंभीर बीमारी से पीड़ित इन बच्चों को हर 20वें दिन जरूरत के हिसाब से खून को फ़िल्टर कर चढ़ाना पड़ता है और समय-समय पर दवाइयां देनी होती हैं। लेकिन जब से कोरोना के मद्देनजर लॉकडाउन लागू किया गया है, तब से इन मरीजों के सामने ब्लड और दवाइयों का संकट खड़ा हो गया है। थैलेसीमिया पीड़ित मरीजों के तीमारदारों की मानें तो बुलंदशहर जिला अस्पताल के थैलेसीमिया वार्ड पर अस्पताल प्रशासन ने ताला लगा दिया गया है। आरोप है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर सुरक्षाकर्मी भी ऐसे मरीज और तीमारदारों का रास्ता रोके खड़े हैं। ऐसे में तीमारदार थैलेसीमिया पीड़ित अपने बच्चों को घरों पर ब्लड चढ़वाकर उनकी जिंदगी की डोर को मजबूत करने की जुस्तजू में लगे हैं।

इस बीच बुलंदशहर में कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने थैलेसीमिया पीड़ित इन मरीजों को ब्लड डोनेट कर इंसानियत की मिसाल भी पेश की है। जनपद में मनवीर मिशन थैलेसीमिया चलाकर देशभर के थैलेसीमिया मरीजों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। मनवीर ने सुप्रीम कोर्ट में थैलेसीमिया मरीजों के उपचार को लेकर एक रिट भी डाली है। जिसपर सुनवाई चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री के बयान का हवाला देते हुए मनवीर कहते हैं कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को मेडिकल स्टोर, वैध हकीम और घरों पर खून चढ़वाना पड़ रहा है। लॉकडाउन में थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चों के सामने परेशानियां ही परेशानियां है। उनको न दवा मिल पा रही है और न ही खून। थैलेसीमिया पीड़ित कई बच्चों की जिंदगी अब खतरे में है।

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क्या है थैलेसीमिया

गौरतलब है कि थैलेसीमिया एक ऐसा रक्त रोग है जिसमें मनुष्य के हमारे शरीर में खून की होने लगती है या हीमोग्लोविन के बनने में परेशानी होती है। ये बीमारी माता-पिता से अनुवांशिक तौर पर बच्चों तक पहुंचती है। यूं तो आमतौर पर हर सामान्य व्यक्ति के शरीर में लाल रक्तकणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है, लेकिन थैलेसीमिया से पीड़ित रोगी के शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र घटकर मात्र 20 दिन ही रह जाती है। इसका सीधा असर व्यक्ति के हीमोग्लोबिन पर पड़ता है और व्यक्ति के एनिमिया के शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है।