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22 सौ से अधिक किसानों का नहीं खरीदा लहसुन

जिले में लहसुन पैदा करने वाले किसानों के साथ इस बार ‘सरकार’ का रवैया ठीक नहीं रहा।
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22 hundred farmers not bought garlic

22 सौ से अधिक किसानों का नहीं खरीदा लहसुन

बूंदी. जिले में लहसुन पैदा करने वाले किसानों के साथ इस बार ‘सरकार’ का रवैया ठीक नहीं रहा। पहले लहसुन खरीद को लेकर कई दिनों तक स्थिति स्पष्ट नहीं की और अब अंतिम तिथि पूरी होने तक खरीद नहीं की गई। ऐसे में पंजीयन कराने के बाद भी बूंदी जिले में 22 सौ से अधिक किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं। हालांकि सरकार ने देर रात लहसुन खरीद की तिथि 30 जून कर दी है।
यह किसान कई दिनों से बूंदी के खरीद केंद्र पुरानी कृषि उपज मंडी में पड़े हैं। यहां सरकार ने मात्र अठारह सौ किसानों का ही लहसुन खरीदा है। वे भी टोकन जारी होने के बाद यहां मारे-मारे फिरते रहे, तब जाकर बारी आई। बुधवार को लहसुन खरीद का अंतिम दिन होने से रात से किसानों का अपनी उपज लेकर आने का सिलसिला शुरू हो गया था। दिन निकलने तक मंडी लहसुन से ठसाठस हो गई। खरीद से जुड़े अधिकारियों ने पहले तो स्थिति स्पष्ट नहीं कि और शाम को तिथि आगे नहीं बढऩे की बात कहते हुए किसानों को टालते रहे। अब जिले के उन 22 सौ किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया जिनका रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी लहसुन नहीं खरीदा गया है।

दिनभर हंगामे के हाल
बूंदी की पुरानी मंडी स्थित लहसुन खरीद केंद्र पर बुधवार को दिनभर हंगामे के हाल बने रहे। किसान अपनी बारी को लेकर कभी खरीद से जुड़े अधिकारी को कभी आपस में उलझते दिखाई पड़े।

क्या करें सा’ब कोई नहीं सुन रहा
किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कोई उपाय नहीं सूझ रहा। वे बार-बार कट्टों को खाली करते उन्हें हवा में साफ करते रहे, तो कभी छंटनी करते दिखे। किसान रामहेत मीणा, बृजमोहन ने बताया कि क्या करें सा’ब इस ‘राज’ में हमारी कोई नहीं सुन रहा। कई दिनों से धक्के खाने के बाद जानकारी यह मिली कि उनका लहसुन सरकार नहीं खरीदेगी।

बर्बाद हो जाएंगे किसान
सरकारी कांटों पर लहसुन की खरीद 32 रुपए किलो होती। अब उन्हें बाजार में पांच से सात रुपए किलो में बेचना पड़ेगा। इससे लागत भी नहीं निकलेगी। किसान रामलाल सैनी ने बताया कि किसान को उसकी उपज का सही दाम मिले यह वादा सरकार का सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह गया। प्रदेश की इस सरकार के समय में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गया।

भंडारण का संकट
किसानों लहसुन को खरीदे नहीं तो रखें कहा। भंडारण की सबसे बड़ी मुसीबत किसानों के सामने हो गई। बूंदी के खरीद केंद्र पर मौजूद किसानों ने कहा कि अभी बाजार में भाव सही नहीं मिल रहा। ऐसे में लहसुन को कुछ माह भंडारण कर रखें, लेकिन रखने की जगह नहीं हैं। अब बारिश में लहसुन खराब होगा। जानकार सूत्रों ने बताया कि यही हाल रहा तो किसानों की स्थिति और खराब हो जाएगी।

खरीद केन्द्र प्रभारी घनश्याम बजाज का कहना है कि ‘सरकार की ओर से निर्धारित तिथि तक लहसुन की खरीद की है। अब लहसुन खरीद की तिथि बढ़ाकर 30 जून कर दी है। खरीद के लिए टोकन जारी कर रखे है। इसी के आधार पर प्राथमिकता तय कर खरीद की जा रही है।’