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गांवों में लगेंगे बायोगैस संयंत्र, जिले की पांच ग्राम पंचायतों के नाम तय

जिले की चयनित ग्राम पंचायत में अब जल्द बायोगैस संयंत्र बनते नजर आएंगे।

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गांवों में लगेंगे बायोगैस संयंत्र, जिले की पांच ग्राम पंचायतों के नाम तय

बूंदी. जिले की चयनित ग्राम पंचायत में अब जल्द बायोगैस संयंत्र बनते नजर आएंगे।इससे गांवों में लकडिय़ों के चूल्हे की जगह गैस पर खाना पक सकेगा। साथ ही काश्तकारों को गांवों में ही उच्च गुणवत्ता वाली खाद भी मिल सकेगी। यह सब होगा गोवर्धन योजना के तहत। जिले की पांच ग्राम पंचायतों में सबसे पहले इसकी शुरुआत करेंगे। इसके लिए यहां चयनित प्रकिया शुरू हो गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से गोवर्धन योजना के तहत गांवों में बायोगैस बनाए जाने की योजना बनी थी। जिसके तहत स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन में देश के ३०० जिलों से एक-एक ग्राम पंचायत को शामिल किया जाना है। जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों से एक-एक ऐसी ग्राम पंचायत का चयन करना है जिसमें बायोगैस बनाने की क्षमता हो। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश के सभी जिला परिषद के सीईओ को गोबर की उपलब्धता वाली एक-एक ग्राम पंचायत का चयन करने के निर्देश जारी किए हैं।

पांच पंचायतों के आए नाम
स्वच्छ भारत मिशन सूत्रों ने बताया कि जिले की १८३ ग्राम पंचायतों में से पांच पंचायतों का नाम योजना के तहत आए हैं। चयन के लिए पशुधन की अधिकता पर जिलेे की ग्राम पंचायत का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें बूंदी का गादेगाल, तालेड़ा का बरूंधन, नैनवां का जरखोदा, हिण्डोली का मांगलीकलां व केशवरायपाटन का बड़ाखेड़ा गांव है।

पंचायत में हो १५० परिवार, दी जाएगी प्राथमिकता
योजना के तहत जिले की जिस ग्राम पंचायत में पशुधन की संख्या ३० से ४० फीसदी होगी उसी को इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के तहत मजबूत ग्रामीणों के समूह में पहली प्राथमिकता महिला स्वयं सहायता समूह की होगी। जिस पंचायत का चयन होगाउस गांव में कम से कम १५० परिवार होंगे। इससे उस पंचायत को पशुधन अधिक होने का लाभ मिलेगा।

यह होगा लाभ
चयनित गांव में बायोगैस तैयार होगी। इसके लिए गांव में एक निर्धारित स्थान पर संयंत्र बनेगा। इस संयंत्र में गांव के सभी पशु पालक गोबर डालेंगे। इससे बनने वाली गैस से इन्हीं ग्रामीणों को कनेक्शन जोड़ दिए जाएंगे जिससे वे घरों में गैस का चूल्हा जला सकेंगे। इससे ग्रामीणों को दो लाभ होंगे। आस-पास के जंगल सुरक्षित होगा और गैस उपलब्ध हो जाएगा।साथ ही साथ गुणवत्ता युक्त खाद भी मिल जाएगी।


स्वच्छ भारत मिशन के समन्वयक निजामुद्दीन का कहना है कि गोबर की सुनिश्चितता वाली पंचायत को चयन करने की प्रकिया शुरू कर दी। जल्द ही चयनित पंचायत में बायोगैस का संयंत्र स्थापित कर दिया जाएगा। प्रथम चरण में पांच पंचायतों का नाम तय किया है।