सर्जरी के दौरान नाक की म्यूकोसा, कार्टिलेज और त्वचा की क्षतिग्रस्त परतों को सावधानीपूर्वक दोबारा जोड़ा गया। इसके बाद त्वचा को प्लास्टिक सर्जरी में उपयोग किए जाने वाले अत्यंत महीन टांकों से बंद किया गया। इस पूरी जटिल प्रक्रिया में करीब 150 टांके लगाने पड़े। चिकित्सकों के अनुसार इतनी गंभीर चोट में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी था, जिससे बालक की स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सका।