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Rajasthan: श्वान के हमले में 7 साल का बच्चा घायल, लगे 150 टांके, 3 घंटे तक चला ऑपरेशन

भीलवाड़ा के जहाजपुर क्षेत्र में श्वान के हमले में 7 साल के बालक कौशल गुर्जर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी नाक पर गंभीर चोट आने के बाद करीब तीन घंटे तक सर्जरी चली, जिसमें 150 टांके लगे।
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बूंदी

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Akshita Deora

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Updated: 6 Aug 2026, 1:43 PM IST

Dog Attack

बच्चे का ऑपरेशन करती टीम का फोटो: पत्रिका

Dog Bite Case In Rajasthan: एक श्वान के हमले में 7 साल के बालक कौशल गुर्जर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना भीलवाड़ा के जहाजपुर क्षेत्र के उराना गांव में उस समय हुई जब कौशल अपनी मां के साथ किसी काम से जा रहा था। इसी दौरान अचानक एक श्वान ने उस पर हमला कर दिया। हमले में बालक की नाक पर गंभीर चोट आई और वह लहूलुहान हो गया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल श्वान को वहां से भगाया और घायल बच्चे को परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचाया।

बूंदी जिले के चिकित्सकों के अनुसार हमले में बालक की नाक का बाहरी और भीतरी दोनों भाग गहराई तक फट गया था। इससे त्वचा, उपास्थि (कार्टिलेज) और अंदरूनी श्लेष्मिक परत (म्यूकोसा) भी प्रभावित हुई। प्राथमिक उपचार ट्रॉमा सेंटर में डॉ. अमर शर्मा द्वारा किया गया। यहां बच्चे को आवश्यक एंटी-रेबीज टीके लगाए गए और संक्रमण से बचाव के लिए अन्य जरूरी उपचार भी शुरू किया गया। चोट की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत प्लास्टिक सर्जन को बुलाकर विस्तृत जांच कराई।

3 घंटे तक चला ऑपरेशन

इसके बाद मरीज का मूल्यांकन प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशीष व्यास ने किया। जांच में सामने आया कि नाक की कई परतें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसे देखते हुए तत्काल आपातकालीन शल्य चिकित्सा करने का निर्णय लिया गया। बच्चे को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, जहां करीब तीन घंटे तक जटिल सर्जरी चली। यह सर्जरी डॉ. आशीष व्यास और डॉ. शुभम व्यास ने संयुक्त रूप से की। वहीं एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. सीमा मीणा और डॉ. ममता शर्मा ने संभाली।

लगाने पड़े 150 टांके

सर्जरी के दौरान नाक की म्यूकोसा, कार्टिलेज और त्वचा की क्षतिग्रस्त परतों को सावधानीपूर्वक दोबारा जोड़ा गया। इसके बाद त्वचा को प्लास्टिक सर्जरी में उपयोग किए जाने वाले अत्यंत महीन टांकों से बंद किया गया। इस पूरी जटिल प्रक्रिया में करीब 150 टांके लगाने पड़े। चिकित्सकों के अनुसार इतनी गंभीर चोट में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी था, जिससे बालक की स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सका।

प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि वर्तमान में बालक की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। चिकित्सकों का अनुमान है कि उचित देखभाल और दवाइयों के साथ करीब एक सप्ताह में घाव भरना शुरू हो जाएगा। फिलहाल बच्चे को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और समय-समय पर उसकी स्थिति की जांच की जा रही है।