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Bundi : मानसून की बेरुखी और सूखी नहरों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

क्षेत्र में इस बार मानसून की बेरुखी और टेल क्षेत्र तक नहरी पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं। आसमान में रोज काले बादल छाते हैं, लेकिन केवल हल्की बूंदाबांदी होकर रह जाती है, जिससे खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। मालिकपुरा के किसान जितेन्द्र चौधरी, हरिशंकर शर्मा, गिरिराज शर्मा, हरिशंकर जमोदीया,व नोताडा के किसानों ने बताया की शुरुआत में सीमित बारिश के बीच किसानों ने जोखिम उठाकर खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी।
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बूंदी

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pankaj joshi

Aug 04, 2026

Bundi : मानसून की बेरुखी और सूखी नहरों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

नोताडा. पानी के अभाव में खाली पड़ी मालिकपुरा डिस्ट्रीब्यूटरी। पत्रिका

नोताडा. क्षेत्र में इस बार मानसून की बेरुखी और टेल क्षेत्र तक नहरी पानी नहीं पहुंचने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं। आसमान में रोज काले बादल छाते हैं, लेकिन केवल हल्की बूंदाबांदी होकर रह जाती है, जिससे खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। मालिकपुरा के किसान जितेन्द्र चौधरी, हरिशंकर शर्मा, गिरिराज शर्मा, हरिशंकर जमोदीया,व नोताडा के किसानों ने बताया की शुरुआत में सीमित बारिश के बीच किसानों ने जोखिम उठाकर खरीफ फसलों की बुवाई कर दी थी।

अब बुवाई के लगभग एक माह बाद भी पर्याप्त वर्षा नहीं होने और नहरों में पानी टेल तक नहीं पहुंचने से फसलें सूखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि बीज और बुवाई पर खर्च पहले ही हो चुका है। यदि समय रहते बारिश नहीं हुई तो खाद और दवाइयों पर होने वाला खर्च भी बेकार चला जाएगा। बारिश की लगातार बेरुखी से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर किसान धान की खराब होती फसल की हंकाई का कार्य शुरू कर चुके हैं तो कई जगह धान की हंकाई करने की तैयारी कर रहे हैं ।

अतिवृष्टि ने बढ़ाया था धान का रकबा

इंद्रगढ़ तहसील में पहले किसान मुख्य रूप से सोयाबीन, उड़द, मूंग, मक्का और तिल्ली जैसी खरीफ फसलें उगाते थे, लेकिन गत तीन-चार वर्षों में लगातार अतिवृष्टि के कारण खेतों में पानी भरने से इन फसलों को भारी नुकसान होने लगा। ऐसे में किसानों ने धान की खेती को बेहतर विकल्प मानते हुए उसका रकबा बढ़ा दिया। हालांकि पिछले वर्ष दीपावली के समय हुई भारी बारिश के कारण कई किसान धान की कटाई तक नहीं कर सके और खेतों में खड़ी फसल खराब हो गई थी।

टेल क्षेत्र में नहीं पहुंचा पानी

इस वर्ष भी अधिकांश किसानों ने धान की बुवाई की, लेकिन अब पर्याप्त बारिश नहीं होने और नहरे पानी के अभाव मे धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई और नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचा, तो खरीफ सीजन की बड़ी फसल चौपट हो सकती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

नहरों में खरीफ की फसल की उपेक्षा अभी पानी कम मिल रहा है, फिर भी कल से थोड़ा लेवल बढ़ाएंगे तथा ऊपर की डिस्ट्रीब्युटरी तथा माइनरों को डाउन करके शीघ्र ही नीचे पानी बढ़ाया जाएगा।
रिंकु मीणा, सहायक अभियंता सीएडी लबान