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आध्यात्मिकता का उजियारा फैलाने बन बैठी ब्रह्माकुमारी

सेवा की सिल्वर जुबली पर पत्रिका से सांझा किए ब्रह्माकुमारी रजनी ने अपने विचार
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आध्यात्मिकता का उजियारा फैलाने बन बैठी ब्रह्माकुमारी

बूंदी. आध्यात्म के जरिए सेवा का भाव लिए ब्रह्माकुमारी रजनी के लिए रविवार का दिन बेहद खास होगा। ब्रह्मकुमारी रजनी के सफऱ को पूरे 25 साल होने जा रहें है और इसी खुशी में छोटी काशी बूंदी में सिल्वर जुबली कार्यक्रम मनाया जाएगा।

13साल की इतनी कम उम्र में कैसे वो भक्ति के गूढ रहस्यों को समझी ओर इसके लिए उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा इन्ही सभी बातों पर ब्रह्मकुमारी रजनी ने पत्रिका के साथ अपने विचारों को सांझा करते हुए कहा कि कोई भी विपरित दिशा में चलता है, तो विरोध का सामना करना पड़ता है, जो उन्हें भी करना पड़ा।

मध्यप्रदेश जबलपुर की रहने वाली ब्रह्माकुमारीरजनी बाल्यावस्था में ही आध्यात्म के करीब आ गई थी। ब्रह्माकुमारी संस्थान से उनका जुड़ाव बढ़ता ही चला गया और सन् 1993 में पूरी तरह से अपना जीवन आध्यात्म की ओर समर्पित कर दिया।

मदर टेरेसा को अपनी जिदंगी का रोल मॉडल मानने वाली रजनी सारे सांसारिक बंधकों को तोड़ आधायात्म जीवन में ऐसी रमी कि पिछले 25 सालो से ब्रह्माकुमारी संस्थान के जरिए अपनी सेवाएं दे रही है। इसकी शुरूआत जबलपुर से हुई फिर इंदौर और उसके बाद पीथमपुर जहां 6महिने सेवा में रही उसके बाद तीन साल तक कोटा रही।

1999 में बूंदी आना हुआ तब से आज तक वे सेंट्रल इंचार्ज बनकर सेवा में लगी है। लोगो के मन में एक सवाल हमेशा रहता है, क्या कभी परमात्मा से साक्षात्कार हुआ शायद ब्रह्माकुमारी रजनी से बेहतर इस सवाल का जवाब कोन दे सकता है। उन्होनें इस दिव्य शक्ति की अनुभूति को करीब से महसूस किया है। इसका किस्सा भी उन्होनें पत्रिका से सांझा किया।

वे कहती है कि भक्ति का भाव उनको अपनी मां रानी के गुणों से बचपन में मिला। होश संभालने के बाद से वे उपवास पूजा पाठ करती थी। लेकिन सांसरिक मोह माया छोडऩे का फैसला उन्होनें जब लिया तब ब्रहकुमारी संस्थान में अपनी सेवाएं देने वाली अन्य दीदीयों को देखा।

चेहरे पर पवित्रता का तेज व ओजस्वी वाणी से इतनी प्रभावित हुई की खुद को इस दिशा में ही मोड़ लिया। बाद में परिवार वालो का सपोर्ट भी मिला। घर से दूर रहकर इस जीवन को निभाना इतना आसान नही यह भय परिवार में भी लगा रहा लेकिन इतनी कम उम्र में जब रजनी ने खुद को साबित किया तो माता पिता को भी अपनी बेटी पर नाज होने लगा। ।

जब भी घर परिवार में कोई कार्यक्रम होता है, तो सदस्यों को लगता है, कि घर में किसी देवी का प्रवेश हुआ हो। वे कहती है कि बेटी किसी भी क्षेत्र में जाए लेकिन एक लक्ष्य और इमानदारी से जीवन में आगे बड़े तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होनें पत्रिका के माध्यम से युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि जिंदगी में आध्यात्म का समावेश होना बेहद जरूरी क्योंकि आध्यात्म से ही जीवन सच्ची सुख शांति मिलती है।

आध्यात्म ही है,जो हमारे विचारों को ऊंचाइयों तक ले जाता है। साथ ही ऊंच नीच का भेद भी मिटाता है। आज की पीढ़ी समझदार है,लेकिन आधुनिकता की होड़ में संवेदना और सहनशीलता से दूर होती जा रही है। बड़ो के बीच सम्मान बेहद जरूरी है। आधुनिकता के साथ आध्यात्म को भी जोड़े ताकि जीवन में बेलेंस बना रहें-