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सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ बागवानी में पहचान बनाई मिला पुरस्कार और लाखों की कमाई

Success Story: नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है क्षेत्र का नरेश गुर्जर। एमएससी उत्तीर्ण नरेश ने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ कर अपने गांव में स्थित करीब चार बीघा भूमि में बेर, अमरूद, मौसमी, चीकू आदि फलों का बगीचा तैयार किया।

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Bundi Naresh Gurjar CRPF job Left made a mark in gardening

बृजभूषण शर्मा @ बडियालकला (बांदीकुई)। नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है क्षेत्र का नरेश गुर्जर। एमएससी उत्तीर्ण नरेश ने सीआरपीएफ की नौकरी छोड़ कर अपने गांव में स्थित करीब चार बीघा भूमि में बेर, अमरूद, मौसमी, चीकू आदि फलों का बगीचा तैयार किया। इससे वह सालाना करीब 10 लाख रुपए की कमाई कर रहा है। गुर्जर को उत्तराखंड के पंतनगर में गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय में फलों के पौधों की प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार से नवाजा भी जा चुका है।

प. बंगाल से लाए पौधे
अपने चार बीघा खेत में पश्चिम बंगाल से बेर के पौधे लाकर बगीचा स्थापित किया। इससे पहले साल ही अच्छा मुनाफा हुआ। फिर विभिन्न प्रकार के फलों का उत्पादन शुरू किया। वर्तमान में मिस इंडिया, कश्मीरी रेड एप्पल, ग्रीन थाई एप्पल बेर के करीब 600 पौधे, अमरूद के विभिन्न वैरायटी के 300 पौधे, मौसमी, चीकू के सैकड़ों पौधे लगे हुए हैं। इन सबसे लगभग 10 लाख रुपए की सालाना कमाई हो रही है। नरेश ने बताया, उनके यहां उत्पादित फलों की राजस्थान के विभिन्न जिलों सहित पंजाब, दिल्ली व उत्तराखंड में भी बहुत मांग है। पिकअप व ट्रकों के माध्यम से सभी जगह बिक्री के लिए फल भेजे जाते हैं।

जैविक खाद का उपयोग
किसान ने बताया, बूंद बूंद सिंचाई से खेती कर रहे हैं। इसके लिए सरकार से 75 प्रतिशत अनुदान मिला है। जैविक खाद का उपयोग करते हैं। इससे फलों की गुणवत्ता बनी रहती है। पौध लगाने के बाद साल भर में फल आने शुरू हो जाते हैं। कीट आदि से बचाव के लिए फ्लाई ट्रैप दवा का छिड़काव करते हैं।

किसानों को देते हैं प्रशिक्षण
कृषि कार्य के साथ ही नरेश किसानों को प्रशिक्षण देकर अधिक उत्पादन वाली बागवानी फसलों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही उनको अच्छी वैरायटी के पौधे उपलब्ध करवाते हैं। इससे पहले स्वयं भी कृषि अधिकारियों के सहयोग से विभिन्न योजनाओं की जानकारी लेकर आगे बढ़े हैं।

कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाओं को अपनाकर नरेश गुर्जर ने बगीचा स्थापित किया है। इससे वह आठ से 10 लाख रूपए सालाना कमा रहा है। किसानों को ड्रिप सिस्टम से खेती करने पर एक हेक्टेयर भूमि पर 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। अन्य किसानों को भी इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
उदल सिंह गुर्जर, सहायक कृषि अधिकारी, बांदीकुई