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बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी में निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर न्यायालय ने लगाई रोक

बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी की समिति का निर्धारित समय पर पंजीयन नहीं कराने और बाद में ब्ल्यू प्रिंट से छेड़छाड़ कर भू-खंड बेचने के चल रहे मामले में न्यायालय ने निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर रोक लगा दी।

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बूंदी

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pankaj joshi

Feb 11, 2021

बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी में निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर न्यायालय ने लगाई रोक

बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी में निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर न्यायालय ने लगाई रोक

बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी में निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर न्यायालय ने लगाई रोक
नए पट्टे जारी करने, पट्टों का अंतरण व पंजीकरण नहीं करा सकेंगे: नवजीवन संघ कॉलोनी समिति की मानी अनियमितताएं
पहले समिति का पंजीयन नहीं कराने और बाद में ब्ल्यू प्रिंट से छेड़छाड़ कर भू-खंड बेचने का मामला
बूंदी. बूंदी की नवजीवन संघ कॉलोनी की समिति का निर्धारित समय पर पंजीयन नहीं कराने और बाद में ब्ल्यू प्रिंट से छेड़छाड़ कर भू-खंड बेचने के चल रहे मामले में न्यायालय ने निर्माण और भू-खंडों के पंजीयन पर रोक लगा दी। न्यायालय ने दिए आदेश में भूखंड का बेचान करने, नए पट्टे जारी करने एवं पूर्व में जारी किए गए पट्टों का अन्तरण व पंजीकरण कराने पर रोक लगा दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि नवजीवन संघ कॉलोनी की समिति ने प्रथम दृष्टया कई अनियमिमताएं की है। न्यायालय ने समिति को आदेश दिया कि नगर परिषद में कोई अभिलेख स्थातंरित नहीं करें। साथ ही नगर परिषद को भी इसके लिए पाबंद किया कि नवजीवन संघ का कोई दस्तावेज जमा किया हों तो उसे एक माह की अवधि के भीतर समिति को लौटा दें।
समिति की ओर से फर्जीवाड़ा और मूल नक्शे में बिना स्वीकृति बदलाव कर भू-खंड बेचने और निर्धारित सामाजिक कार्यों के लिए छोड़े भू-खंडों की साइज बदल देने के मामले में बूंदी की नवजीवन संघ (गेट - 2) कॉलोनी निवासी मनीष गौतम ने बूंदी सिविल न्यायालय की शरण ली थी। न्यायालय को बताया था कि नवजीवन संघ समिति अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रदीप चित्तौड़ा, सचिव त्रिलोकचंद जैन, सह सचिव सोहनलाल सुमन, सदस्य निर्देशक चंद्रशेखर शर्मा, नगर परिषद आयुक्त ने मिलकर निर्धारित ब्ल्यू प्रिंट को बदल दिया। यही नहीं वन विभाग और सिचायचक भूमि तक पर भू-खंड काटकर बेचान कर दिया। इसका ब्ल्यू प्रिंट बाद में बदल दिया।
यहां छत्रपुरा ग्राम पंचायत में स्थिति कृषि भूमि रकबा 439 बीघा 7 बिस्वा में से 134 बीघा 2 बिस्वा जमीन को गरीब एवं बेघर लोगों को आवास बनाने के उद्देश्य से जिला कलक्टर ने 7 दिसम्बर 1972 में आबादी भूमि में परिवर्तित किया था। इसके बाद उक्त 134 बीघा 2 बिस्वा भूमि नवजीवन संघ को हस्तांतरित कर दी गई थी। तब नवजीवन संघ ने इसी नाम से कॉलोनी स्थापित कर ब्ल्यू प्रिंट तैयार कराया। इस ब्ल्यू प्रिंट के आधार पर भू-खंड आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी। बाद में जब समिति के बारे में सहकारी समिति, समितियों के रजिस्ट्रार एवं उप रजिस्ट्रार आदि कार्यालयों से मनीष गौतम ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी जुटाई तो समिति के उनके कार्यालय में पंजीकृत होने से मना कर दिया। समिति ने अपने को एक पंजीकृत सार्वजनिक प्रन्यास बताया और उक्त नवजीवन संघ के प्रन्यास की हैसियत से पंजीकृत करवाने की रजिस्टर्ड डीड की प्रतिलिपि प्रस्तुत की, जिससे पता चला कि उक्त समिति को बतौर सार्वजनिक न्यास पंजीकृत वर्ष 2013 में किया गया। जबकि उक्त समिति की स्थापना का वर्ष 1967-68 बताया। तब समिति को उक्त समयावधि में प्रथम दृष्टया अवैध रूप से संचालित किया जाना माना गया।
कोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी समिति
समिति ने न्यायालय में 6 दिसम्बर 2017 का तैयार कर ब्ल्यू प्रिंट प्रस्तुत किया, लेकिन कॉलोनी के अस्तित्व में आने के वर्ष 1972 के बाद से वर्ष 2017 तक कोई परिवर्तन नहीं किया हो, वर्ष 2017 का ब्ल्यू प्रिंट ही कॉलोनी का मूल ब्ल्यू प्रिंट हों, ऐसा समिति कोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। जबकि न्यायालय इस मामले में समिति को कई बार आदेश देता रहा। समिति के लोगों ने बचने की गली निकालते हुए दस्तावेज नगर परिषद को सुपुर्द करने के प्रयास शुरू कर दिए। समिति न्यायालय को भी सही जानकारी देने से बचती रही।
यों किया खेल....
समिति के वर्ष 2011 के ब्ल्यू प्रिंट को देखने पर पता चला कि कॉलोनी के मध्य 215 गुणा 570 फीट के एक भू-भाग को स्कूल, खेल मैदान एवं ओवरहेड टैंक के लिए आरक्षित किया गया था। जिसमें स्कूल का क्षेत्र 210 गुणा 215 फीट, खेल मैदान का माप 215 गुणा 270 फीट निर्धारित किया। जबकि वर्ष 2017 के ब्ल्यू प्रिंट में उक्त विद्यालय के लिए 150 गुणा 215 फीट रह गया। इसी प्रकार खेल मैदान की लंबाई 270 फीट से घटकर 120 फीट गुणा 215 फीट कर दी। यानी विद्यालय के भू-खंड की लंबाई में से 60 गुणा 215 फीट के क्षेत्रफल तथा खेल मैदान की लंबाई में से 150 गुणा 215 फीट क्षेत्रफल कम कर दिया गया। उक्त जमीन में से समिति ने अपने स्तर पर भू-खंड काटकर बेचान कर दिया। जो कि पूर्व के ब्ल्यू प्रिंट में प्रदर्शित नहीं थे। कॉलोनी में स्थिति दोनों पार्कों के बीच में किसी प्रकार का कोई भू-खंड वर्ष 2011 के ब्ल्यू प्रिंट में स्थित नहीं था, जबकि वर्ष 2017 के ब्ल्यू प्रिंट में दोनों पार्कों के बीच एक दर्जन से अधिक भू-खंड निकाल लिए। जो पार्क की जमीन को काटकर बनाए गए बताए। यहां सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि समिति ने कॉलोनी के बाशिंदों के अधिकारों का हनन किया।
न्यायालय ने यह दिया आदेश
मामले में परिवादी की ओर से पेरवी कर रहे अधिवक्ता लीलाधार सिंह ने बताया कि सिविल न्यायाधीश निखिल कुमार नाड ने खुले न्यायालय में सुनाए आदेश के अनुसार समिति किसी भी व्यक्ति को नवजीवन संघ एवं उसमें स्थिति स्वयं के स्वामित्व के भू-खंड का बेचान नहीं करेंगे। नए पट्टे या पूर्व में जारी किए गए पट्टों का अन्तरण व पंजीकरण नहीं करेंगे। न ही ऐसा अन्य से करा सकेंगे। समिति ने कई अनियमितताएं की जिनकी जांच सक्षम अधिकारी करेंगे। उक्त स्थिति में समिति दस्तावेज नगर परिषद को स्थानान्तरित नहीं कर सकेगी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दस्तावेज नगर परिषद को दिए गए तो कार्रवाई में बाधा माना जाएगा। इसके लिए समिति के पांचों पदाधिकारियों को कोर्ट ने पाबंद किया। कोर्ट ने इस मामले में नगर परिषद आयुक्त को भी पाबंद किया कि उक्त समिति ने कोई दस्तावेज जमा करा दिया हों तो उसे एक माह की अवधि में वापस भेज दें। समिति ने वर्ष 2017 का ब्ल्यू प्रिंट कॉलोनी का नवीनतम नक्शा बताया, ऐसे में मूल वाद के निर्णय तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। कोर्ट ने कहा कि समिति, साथ ही खाली पड़े भू-खंडों पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं करें, न ही ऐसा किसी से कराएं।