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चांदा का तालाब में एक दर्जन से अधिक जगहों पर रिसाव, 15 दिनों में एक फीट हुआ खाली

जिले में सबसे पहले बरसात में भरने वाला चांदा का तालाब बांध में रिसाव शुरू हो गया है। 24 फीट से अधिक भराव क्षमता वाले बांध में अब तक 23 फीट से अधिक पानी की आवक हो चुकी है

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चांदा का तालाब में एक दर्जन से अधिक जगहों पर रिसाव, 15 दिनों में एक फीट हुआ खाली

चांदा का तालाब में एक दर्जन से अधिक जगहों पर रिसाव, 15 दिनों में एक फीट हुआ खाली

नमाना. जिले में सबसे पहले बरसात में भरने वाला चांदा का तालाब बांध में रिसाव शुरू हो गया है। 24 फीट से अधिक भराव क्षमता वाले बांध में अब तक 23 फीट से अधिक पानी की आवक हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अभियंताओं की अनदेखी के चलते लगातार बांध का पानी व्यर्थ बह रहा है। वर्तमान में बांध में 21 फीट पानी मौजूद है। बांध में करीब एक दर्जन जगह से रिसाव हो रहा है। सूत्रों की माने तो 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी रिसाव के चलते व्यर्थ बह रहा है अगर इसी तरह रिसाव होता रहा तो दिसंबर माह में ही बांध पूरी तरह से खाली हो जाएगा। जिसके चलते किसानों की फसलें को पानी नहीं मिल पाएगा। वहीं पीने के पानी के लिए भी पशुओं को दर-दर भटकना पड़ेगा। इसके बावजूद भी जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा रिसाव को रोकने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

इतिहास भी अच्छा नहीं
वर्ष 1990 में बांध के निर्माण कार्य की नींव रखी गई थी। 2 वर्ष के समय में बांध का निर्माण कार्य पूरा हुआ, लेकिन जैसे ही निर्माण कार्य पूरा हुआ। 1992 में बांध क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद 95 में बांध का निर्माण फिर से किया गया। जैसे तैसे करके बांध का निर्माण कार्य पूरा हुआ, लेकिन उस समय तकनीकी खामी के चलते बाद में 1 दर्जन से अधिक जगह पर नीचे की सतह पर रिसाव शुरू हो गया, जो 8 दिन तक नहीं रुका। अगस्त 2012 में बांध की दीवार पर एक 2 फीट गहरा छेद हो गया। जिससे बांध के टूटने का खतरा अधिक मंडराने लगा। इसके चलते तत्कालीन जिला कलक्टर व जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने वेस्ट वेयर की दीवार को तोडकऱ बांध का पानी खाली किया। ताकि बांध को फूटने से बचाया जा सके। उसके बाद से आज दिन तक बांध का रिसाव रोकने के लिए किसी ने कोई ठोस प्रयास नहीं किया। बांध के निर्माण कार्य से लेकर अब तक कई सरकारें आई और गई, लेकिन किसी भी सरकार ने इस बांध के जीर्णोद्धार के लिए कोई ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं की।

दो करोड़ खर्च फिर भी रिसाव बंद नहीं
वर्ष 2014 में जल संसाधन विभाग द्वारा बांध के रिसाव को रोकने के लिए दो करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन उसके बाद भी पानी के व्यर्थ बहने का सिलसिला नहीं थमा। वर्तमान में नहर में पानी छोडऩे से ज्यादा पानी तो रिसाव के होने के चलते व्यर्थ बह रहा है। विभाग के अभियंताओं के पास भी बांध के रिसाव को रोकने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है।

डर के मारे नहीं भरते बांध
कहते हैं कि दूध का जला हुआ छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है। ऐसा ही चांदा का तालाब बांध के अधिकारियों के साथ हो रहा है। बांध के अधिकारियों ने बांध के टूटने के डर से वेस्ट वेयर की दीवार को ही तोड़ रखा है, ताकि बांध अपनी भराव क्षमता के अनुसार नहीं भरे व टूटने का खतरा कम रहे। वैसे तो बांध की भराव क्षमता 24.60 फीट है, लेकिन दिवार तोडऩे के बाद तीन फीट खाली रहता है।
बांध की मरम्मत के लिए कई बाहर विभाग के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं, जिस समय में जल संसाधन उपयोगिता का अध्यक्ष था। उसमें भी मैंने मरम्मत के लिए कहीं प्रयास किए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिसका खामियाजा अब किसानों को उठाना पड़ रहा है। बांध दिसंबर के माह में खाली हो जाता है, अगर यह रिसाव रुक जाए तो पूरी फसलों को पानी देने के बाद भी बाद में करीब 8 से 10 फीट पानी शेष बचे।

श्योजी लाल मीणा पूर्व अध्यक्ष जल उपयोगिता संगम चांदा का तालाब बांध
राज्य सरकार को बांध की मरम्मत के लिए 6 करोड़ रुपए से ऊपर के प्रस्ताव भेज रखे हैं। जैसे ही प्रस्ताव स्वीकृत होगा, कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। वैसे बांध टूटने का कोई खतरा नहीं है। वहीं किसानों को बांध का पूरा पानी उपलब्ध करवाते हैं। रिसाव से थोड़ा बहुत पानी ही खत्म होता है। जिससे फसलों को पानी देने में कोई दिक्कत नहीं है।
राजेंद्र पाटनी अधिशासी अभियंता जल संसाधन विभाग बूंदी