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कलक्टर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के अनुसार करें प्रमाण पत्र जारी

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष हरिमोहन शर्मा ने कोरोना पीडि़त परिवारों को मदद के लिए सरकार की मंशा अनुरूप जिला प्रशासन से संवेदनशील रुख रखने की मांग की। परिवारों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री की भावना से अवगत कराते हुए शर्मा ने कहा कि महामारी में अनाथ हुए बच्चों, विधवा महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सामाजिक व शैक्षणिक संबल प्रदान करना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Jul 09, 2021

कलक्टर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के अनुसार करें प्रमाण पत्र जारी

कलक्टर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के अनुसार करें प्रमाण पत्र जारी

कलक्टर मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता के अनुसार करें प्रमाण पत्र जारी
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष हरिमोहन शर्मा ने कहा: कोविड मृतकों के प्रमाण पत्र संवेदनशील होकर जारी करें
बूंदी. कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष हरिमोहन शर्मा ने कोरोना पीडि़त परिवारों को मदद के लिए सरकार की मंशा अनुरूप जिला प्रशासन से संवेदनशील रुख रखने की मांग की। परिवारों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री की भावना से अवगत कराते हुए शर्मा ने कहा कि महामारी में अनाथ हुए बच्चों, विधवा महिलाओं को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सामाजिक व शैक्षणिक संबल प्रदान करना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।
1 मार्च 2020 से अब तक कोरोना पीडि़तों की मृत्यु के फलस्वरूप माता-पिता की मृत्यु होने, पति की मृत्यु होने और उस विधवा महिला और नाबालिक बच्चों के भरण-पोषण करना इस योजना का मूल उद्देश्य है। जिला कलक्टर के प्रमाणन के आधार पर ही कोरोना से पीडि़त लोगों की मृत्यु होने वालों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान होगी।
कोरोना से मृत्यु का मूल आधार प्रमाण पत्र है। इस लिए जिला कलक्टर प्रमाण पत्र जारी करने से पहले राजकीय चिकित्सालय में भर्ती मरीजों की कोरोना वायरस से मृत्यु के प्रमाण पत्रों को जारी करते समय ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति, महिला या दोनों कोरोना के उपचार के दौरान मरे हैं और उनका कोई अन्य टेस्ट नहीं हो पाया, उन्हें भी इसी श्रेणी में लेने का विचार किया जाना चाहिए।
इसी प्रकार नगर निकायों की ओर से जिन व्यक्तियों को कोरोनावायरस काल में जलाया अथवा दफनाया गया है, उनका मृत्यु प्रमाण पत्र देने के समय विचार किया जाना आवश्यक है। क्योंकि लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिसमें दोनों पति-पत्नी की मृत्यु हो या पति की मौत के बाद पत्नी जिंदा हो। उसके अल्प व्यस्क बच्चे हैं। इस कारण संवेदनशील तरीके से मुख्यमंत्री की सोच के अनुसार उदारता पूर्वक निर्णय करना चाहिए।