2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मां के दूध का बताया महत्व, विजेताओं को किया पुरस्कृत

सामान्य चिकित्सालय के आंचल मदर मिल्क बैंक में मनाए जा रहे स्तनपान सप्ताह का शनिवार को समापन हुआ।

2 min read
Google source verification
मां के दूध का बताया महत्व, विजेताओं को किया पुरस्कृत

मां के दूध का बताया महत्व, विजेताओं को किया पुरस्कृत

बूंदी. सामान्य चिकित्सालय के आंचल मदर मिल्क बैंक में मनाए जा रहे स्तनपान सप्ताह का शनिवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ.प्रभाकर विजय थे। अध्यक्षता मिल्क बैंक प्रभारी डॉ.जी.एस. कुशवाह ने की।
डॉ.प्रभाकर नेे मां के दूध के महत्व को समझाते हुए स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं प्रसूता व नवजात शिशु को मां का दूध उपलब्ध करवाने वाले मिल्क बैंक को मां तुल्य बताया। स्तनपान सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियां हुई। पोस्टर, स्लोगन, प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम के विजेताओं को जेसीआई ऊर्जा क्लब की ओर से पुरस्कृत किया गया। डॉनर रूम इंचार्ज सुनीता मीणा को प्रसूताओं को नवजात शिशु को दूध पिलाने में सक्षम बनाने में दे रही सेवाओं के लिए सम्मानित किया। मिल्क बैंक मैनेजर ममता अजमेरा ने आभार जताया। इस दौरान जेसीआई क्लब की मेघना शेखावत, प्रेसिडेंट साधना न्याती, नंदनी विजयवर्गीय, ख्याति भंडारी, डॉ.मंजू युगल, शिशु विभाग के एचओडी डॉ. गजानंद वर्मा, नर्सिंग अधीक्षक सत्यनारायण मीणा, सोवरन सिंह, अमर सिंह यादव, एएनएम ट्रेनिंग सेंटर प्रिंसिपल ज्योति वर्मा आदि मौजूद रहे।
इधर, दूध दान करने वाली प्रसूता-माताओं को इनरव्हील क्लब की ओर से साडिय़ां भेंट की। इस दौरान अध्यक्ष श्यामलता शर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर सचिव लीला गोयल, किरण शर्मा, आशा अग्रवाल, राधा शर्मा, निशा गुप्ता, गायत्री गुप्ता, मिल्क बैंक नर्सिंग ऑफिसर अमरीन अंसारी, मधुबाला आर्य आदि मौजूद रहे।

कार्यशाला में समझाया मां के दूध का महत्व
बूंदी ञ्च पत्रिका. शहर के माहेश्वरी चिल्ड्रन हॉस्पीटल में शनिवार को स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ. वी.एन. माहेश्वरी ने कहा कि स्तनपान नवजात शिशु व बच्चों के लिए सबसे उत्तम आहार है। इससे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अन्य बच्चों से अधिक होती है। मां का दूध पीने वाले बच्चों में निमोनिया व दस्त दूसरे बच्चों की तुलना में चार से 14 फीसदी तक का अंतर होता है। इस दौरान उपस्थित महिलाओं ने इसे लेकर सवाल पूछे जिनका भी डॉ. माहेश्वरी से जवाब दिया।