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गर्मी से पहले गांवों में भूजल स्तर गहराया, अधिकारी बेखबर

क्षेत्र के दर्जनों गांवों में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी पाताल में चला जाने के कारण ग्रामीणों को गंभीर पेयजल समस्या आ गई है। अधिकांश गांवों में बोरिंग में पानी सूख गया है,वहीं कुओं के पेंदे नजर आने लगे हैं।

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बूंदी

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pankaj joshi

Mar 18, 2024

गर्मी से पहले गांवों में भूजल स्तर गहराया, अधिकारी बेखबर

गर्मी से पहले गांवों में भूजल स्तर गहराया, अधिकारी बेखबर

गर्मी से पहले गांवों में भूजल स्तर गहराया, अधिकारी बेखबर
हिण्डोली. क्षेत्र के दर्जनों गांवों में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी पाताल में चला जाने के कारण ग्रामीणों को गंभीर पेयजल समस्या आ गई है। अधिकांश गांवों में बोरिंग में पानी सूख गया है,वहीं कुओं के पेंदे नजर आने लगे हैं।

जानकारी अनुसार गत वर्ष क्षेत्र में बारिश कम होने के कारण शुरू से ही भूजल स्तर गहरा गया है, यहां पर सभी जल स्रोत खाली रहने से कुएं, बावड़ी में भी पानी की आवक कम हुई। धीरे-धीरे जलस्तर गहरा जाने से फरवरी व मार्च माह के शुरुआत में ही स्थितियां बिगडऩे लगी है। सूत्रों ने बताया कि हिण्डोली, पेच की बावड़ी, टोकडा, रोशंदा, पगारा, उमर सहित अन्य गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है।

किसानों में लगी है बोरिंग लगाने की होड़
क्षेत्र का आधा भाग डार्क जोन की स्थिति होने से पानी गहरा गया है। इसके बाद भी किसानों में बोरिंग लगाने की होड़ मची हुई है। यहां पर स्थानीय व मद्रास की ओर से आने वाले बोरिंग मशीन संचालक किसानों के खेतों में दिन-रात बोर कर रहे हैं। एक बोर में पानी नहीं आने पर किसान दूसरा बोर करवा रहे है। यहां पर अंधाधुंध हो रहे बोरिंग को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठा रहा हैं।

गर्मी में रहना पड़ेगा टैंकरों के पानी पर निर्भर
मार्च के प्रथम सप्ताह में पानी की स्थितियां गंभीर होने लगी है। ऐसे में क्षेत्र के ग्राम पंचायत पेच की बावड़ी, टोकडा, रोशंदा, उमर, पगारा, देवजी का थाना, विजयगढ़, सहसपुरिया, खींण्या, नेगढ, सावंतगढ़ सहित कई ग्राम पंचायतों के लोगों को टैंकरों से जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ेगा। वहीं पर पशुओं के समक्ष भी पानी की गंभीर समस्या आ जाएगी।

एक कनिष्ठ अभियंता के भरोसे 41 ग्राम पंचायतें
इसे विडंबना ही कहा जाए कि हिण्डोली क्षेत्र में वर्ष 2003, 2009 व 2018 में भीषण अकाल पड़ा था। ऐसे में यहां पर सरकारों द्वारा पेयजल की व्यवस्था टैंकरों से करवाई थी। उसके 2 वर्ष पूर्व यहां पर चंबल परियोजना स्वीकृत हुई। एवं योजना के लिए कार्य शुरू किया लेकिन परियोजना नवंबर माह में पूरी होने की अंतिम तिथि है। ऐसे में इस गर्मी में लोगों को पेयजल योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। यहां पर मात्र एक कनिष्ठ अभियंता है। जिसके भरोसे 41 ग्राम पंचायत व एक नगर पालिका का जिम्मा है। कनिष्ठ अभियंता कई बार बैठकों या अवकाश पर रहने पर हालात खराब हो जाते हैं।

3 सौ फीट से अधिक गहराया भूजल
जलदाय विभाग के आधिकारिक सूत्रों की माने तो हिण्डोली कस्बे सहित आसपास के कई ग्राम पंचायतों में भूजल स्तर 300 फीट से अधिक गहरा गया है। ऐसे में अधिकांश सरकारी हैण्डपंपों ने भी पानी देना कम कर दिया गया है। यहां पर खराब हैंडपंपों की सूचना पर ग्राम पंचायत ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में लोगों के समक्ष पानी की समस्या बनी हुई है। सूत्रों ने बताया कि विभाग द्वारा हैंडपंप सुधार अभियान भी चलाया जाना निश्चित है, लेकिन पानी गहराने से समस्या रहेगी।

हिण्डोली-नैनवां क्षेत्र के कुछ भागों में पानी की स्थिति गंभीर है। कोशिश की जा रही हैं की चंबल परियोजना का पानी समय पर मिले, लेकिन इस बार पानी मिलने की संभावना कम है। जहां पर पानी की समस्या आ रही हैं वहां पर अभियंता से रिपोर्ट मंगवाई जाएगी। ताकि टैंकरों से जल परिवहन करवाया जा सके।
डीएन व्यास, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग बूंदी

हिण्डोली सहित आसपास के गांव में भूजल स्थल लगातार गहरा जाने से जल स्तर 300 फीट तक गहरा गया है। ऐसे में कई गांवों में पानी की स्थिति खराब है। 31 मार्च तक हैण्डपंप का रखरखाव ग्राम पंचायत को करना रहता है। यहां पर खराब हैंडपंप की लगातार सूचना मिल रही है, जिससे गांवों में पानी की गंभीर समस्या आएगी वहां पर टैंकरों से जलापूर्ति करवाई जाएगी।
लालाराम, कनिष्ठ अभियंता, जलदाय विभाग हिण्डोली