
तालेड़ा अस्पताल: दर्जा बढ़ा, परिसर नहीं
तालेड़ा अस्पताल: दर्जा बढ़ा, परिसर नहीं
तालेड़ा. राजकीय उप जिला अस्पताल में लगातार मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने से अस्पताल परिसर में मरीजों व परिजनों की भीड़ नजर आ रही है। वहीं मरीज को अस्पताल परिसर में वाहनों को ले जाने में बाधा उत्पन्न हो रही है। अस्पताल परिसर छोटा पडऩे से मरीज को गंभीर समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है।
अस्पताल कई वर्षों से कस्बे के बीच मुख्य मार्ग पर संचालित है। अस्पताल परिसर में चिकित्सकों कर्मचारियों के वाहन खड़े करने तक की जगह नहीं है। वहीं गंभीर मरीज को लाते समय वाहन को अस्पताल परिसर में ले जाने के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। परिसर से वाहनों को हटाया जाता हैं जिसमें भी समय लगता है, जब तक मरीज को उपचार नहीं मिल पाता।
कस्बे के मुख्य मार्ग पर वाहनों के लगातार आवागमन पर आपातकालीन मरीज को लेकर आने वाले वाहन जाम में फंस जाते हैं। कई बार तो मरीजों को बाहर सड़क पर ही उतार कर अंदर ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य कर्मचारी, मरीज व परिजनों को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल परिसर, सीमित मरीजों में इजाफा
तालेड़ा अस्पताल में क्षेत्र के करीब तीन दर्जन गांवों के लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है, लेकिन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने से असुविधाएं बनी हुई है। अस्पताल में अभी मौसमी बीमारियों को लेकर मरीज का आउटडोर करीब 6 सौ अधिक तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज के आने-जाने के लिए अस्पताल का पिछले कई सालों से परिसर सीमित अवस्था में है, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी हो गई है।
परिसर सीमित
यहां सामान्य अस्पताल के रूप में शुरू होकर कई दशकों से संचालित है। उस समय केवल एक या दो चिकित्सक ही कार्यरत थे। उसके बाद क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ने के साथ ही अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती गई। अस्पताल का दर्जा राजकीय सामुदायिक अस्पताल से उप जिला अस्पताल का हो गया। अस्पताल में वर्तमान में 12 चिकित्सक एवं नर्सिंग कर्मियों का स्टाफ कार्यरत है, लेकिन अस्पताल का परिसर सीमित रहा।
अन्यत्र स्थानांतरण ही विकल्प
चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल कस्बे के बीच जहां पर वाहनों का आवागमन होता है। परिसर में वाहनों का प्रवेश करना मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में अन्य स्थान पर भूमि आवंटन कर अस्पताल बनाया जाए। इस अस्पताल को डिस्पेंसरी बनाया जा सकता है या अस्पताल के सहारे विद्यालय को अस्पताल में मर्ज कर परिक्षेत्र बढ़ाया जा सकता है।
अस्पताल में परिसर के संबंध में उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत करवा दिया गया है। अस्पताल में मरीजों के आने जाने के दौरान समस्या का सामना करना पड़ता है। कई बार कस्बे की मुख्य सड़क से वाहन अंदर नहीं आने पर मरीजों व परिजनों को नुकसान उठाना पड़ता है। अस्पताल को अन्य जगह संचालित करने या भूमि आवंटन कर नया अस्पताल का भवन बनाया जाना ही विकल्प है।
डॉ. पीसी मालव, चिकित्सा अधिकारी, राजकीय उपजिला अस्पताल, तालेड़ा
Published on:
05 Mar 2024 05:40 pm
