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परंपरागत खेती छोड़ लगाया गुलाब, हुआ दोगुना लाभ

नैनवां के कासपुरिया गांव के एक किसान ने कोरोना आपदा में न सिर्फ अपने लिए अवसर खोजा बल्कि अब वे कई किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं।
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परंपरागत खेती छोड़ लगाया गुलाब, हुआ दोगुना लाभ

परंपरागत खेती छोड़ लगाया गुलाब, हुआ दोगुना लाभ

नैनवां. नैनवां के कासपुरिया गांव के एक किसान ने कोरोना आपदा में न सिर्फ अपने लिए अवसर खोजा बल्कि अब वे कई किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं। महज एक बीघा में गुलाब एवं सब्जियों की खेती कर परंपरागत फसल से दोगुना लाभ कमाया। अब क्षेत्र के दूसरे किसान उनसे प्रेरणा लेकर गुलाब की खेती करने का मानस बना रहे हैं। कासपुरिया गांव के 30 वर्षीय युवा किसान रामसहाय मीणा ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन के क्षमतावर्धन कार्यक्रमों में भाग लेकर फूलों की खेती से बेहतर आमदनी के बारे में जानकारी ली तथा इस खेती के लाभ के बारे में मालूम चला। छोटे किसान के सामने किसी नवाचार की पहल करने में भी बड़ा जोखिम होता है, लेकिन हिम्मत करके आगे बढ़े और एक बीघा में नवम्बर माह में गुलाब लगाया।
साथ ही बीच में आलू, टमाटर, धनिया एवं प्याज भी लगाया। जिससे 20 हजार रुपए की आमदनी हुई। साथ ही अब तक बेचे गुलाब से 25 हजार रुपए प्राप्त हो चुके हैं। जबकि गुलाब की मुख्य पैदावार तो अक्टूबर-नवंबर से शुरू होगी। रामसहाय के अनुसार इतना मुनाफा पहले कभी किसी दूसरी फसल में नहीं हुआ।
गोबर खाद का किया प्रयोग
किसान मानते हैं कि रसायनिक खेती को छोडकऱ यदि जैविक पद्धति से खेती की जाए, तो उत्पादन कम होता है, लेकिन रामसहाय ने गुलाब की खेती में गोबर की खाद का ही इस्तेमाल किया। किसी भी प्रकार की रसायनिक दवा का छिडक़ाव नहीं किया। रामसहाय ने बताया कि नैनवां के अलग-अलग गांव के किसानों ने अच्छी पैदावार को देखते हुए गुलाब व सब्जियों की खेती करने की सीख ली है। रिलायंस फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर मनीष शर्मा ने बताया कि किसानों को गुलाब की खेती को एक नए अवसर की तरह लेना चाहिए। उद्यान विभाग की तरफ से किसानों को नवीनीकृत खेती करने की प्रेरणा दी जाती है। किसान कम जमीन में गुलाब की खेती कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं।