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‘सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे…’

पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की पुण्यस्मृति में सरगम संस्था की ओर से उनके गीतों की प्रस्तुति देकर स्वरांजलि दी गई।

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बूंदी

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pankaj joshi

Aug 02, 2021

‘सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे...’

‘सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे...’

‘सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे...’
सरगम ने पार्श्व गायक मोहम्मद रफी को किया याद
बूंदी. पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की पुण्यस्मृति में सरगम संस्था की ओर से उनके गीतों की प्रस्तुति देकर स्वरांजलि दी गई।
मुख्य अतिथि राजकुमार माथुर थे। अध्यक्षता डा. मधुसूदन शर्मा ने की। संचालन डा. ओ.पी. वर्मा ने किया। शुरुआत विभा माथुर ने सरस्वती वंदना से की। आरती वैष्णव ने ‘पुकारता चला हूं मैं...’, गुरुप्रीत सिंह ने ‘आपके हसीन रुख पे...’, ‘वादियां मेरा दामन...’, संजय सिंह ने ‘फूलों की रानी...’, ‘सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे...’, सूर्यप्रकाश पाठक ने ‘मुहब्बत के सुहाने दिन...’ गीत गुनगुनाया। डा.मधुसूदन शर्मा ने ‘जब-जब बहार आई...’ डा.गायत्री शर्मा ने ‘जिंदगी भर नहीं भूलेगी...’, विजय शर्मा ने ‘आया रे खिलौने वाला...’ गीत पेश किया। बृजेश सोनी, पवन सोनी, निरंजन जिंदल, राजेन्द्र पुरी, अलंकार शर्मा, डा. ओ.पी वर्मा, दिनेश वैष्णव, बालिका बेबी परा ने भी मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम देर रात दो बजे तल चला।