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Video : आस्था का केन्द्र हैं सदियों पुराने नीलकंठ व पालेश्वर महादेव मंदिर

रियासतकाल में कस्बे में तालाबों का निर्माण कराया तो तालाबों की पाल पर भगवान शिव परिवारों की भी स्थापना कराई। तालाब जितने पुराने हैं, उतने ही पुराने तालाबों पर बने शिव मन्दिर हैं।

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नैनवां. रियासतकाल में कस्बे में तालाबों का निर्माण कराया तो तालाबों की पाल पर भगवान शिव परिवारों की भी स्थापना कराई। तालाब जितने पुराने हैं, उतने ही पुराने तालाबों पर बने शिव मन्दिर हैं। कनकसागर की तालाब पर शिव मन्दिर को नीलकंठ महादेव मन्दिर के नाम से तो नवलसागर तालाब की पाल पर बने शिव मन्दिर को पालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। कस्बे के बुजुर्गों के अनुसार दोनों ही मन्दिर पांच सौ वर्ष पुराने हैं। दोनों मन्दिरों के दो-दो गेट हैं। मन्दिरों से ही तालाब की ओर घाट बने हुए हैं जो नहाने व महादेव के जल चढाऩे के उपयोग में आते हैं। कस्बे में जब भी कोई बड़ा धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन होता है तो उनमें निकाली जाने वाली कलश यात्राएं दोनों मन्दिरों से प्रारम्भ होती है। कस्बे में निकाली जाने वाली तीज भी वन विहार के लिए तालाबों पर इन मन्दिरों के पास ही पहुंचती है। दोनों तालाबों पर अन्य शिव मन्दिर भी बने हुए हैं। जिनमें द्वारिकाधीश महादेव मन्दिर, गुलरेश्वर महोदव मन्दिर और थाने के सामने स्थित पंचमुखी महादेव मन्दिर है। यह सभी शिव मन्दिर बाद के बने हुए हैं।

पालेश्वर महादेव मन्दिर
नवलसागर तालाब की पाल पर पालेश्वर महादेव मन्दिर भी पांच सदी पुराना बताया जा रहा है। मन्दिर की दीवारें व गर्भगृह की बनावट पांच सौ साल पुरानी है। तिबारेनुमा मन्दिर पर गुम्बद बना हुआ है। मन्दिर के अन्दर शिल्पकला हो रही है। इस मन्दिर में भी अलग-अलग गर्भगृहों में दो शिवङ्क्षलगों की स्थापना हो रही है। मन्दिर के सामने एक गढी़ बनी हुई जो अब क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गढी़ व मन्दिर का निर्माण साथ-साथ ही हुआ बताया। दोनों गर्भ गृहों के बीच पूर्वमुखी बालाजी की प्रतिमा स्थापित है। बालाजी की प्रतिमा की स्थापना नागा साधुओं द्वारा करना बताया। पालेश्वर महादेव के यहां दो दिन तक शिवरात्रि मेले का आयोजन होता है।

मन्दिर में सूर्यनारायण की भी छतरी
मन्दिर में एक छतरीनुमा मन्दिर में भगवान सूर्यनारायण भी विराजमान है। सूर्यनारायण की यह प्रतिमा भी उसी काल की है, जिस काल में मन्दिर का निर्माण हुआ था। मन्दिर परिसर में छतरी का निर्माण करवाकर रथ पर सवार सूर्यनारायण की प्रतिमा की स्थापना कराई थी। शिव परिवार का गर्भ गृह व सूर्य मन्दिर एकदम आमने सामने हैं। मन्दिर के अन्दर ही हनुमान मन्दिर भी है। जिनमें स्थापित बालाजी की प्रतिमा पूर्वमुखी है।


नीलकंठ महादेव मन्दिर
कनकसागर तालाब की पाल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर दो शिव परिवार स्थापित है। दोनों स्थानों पर ही अलग-अलग गर्भ गृह बने हुए हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पहले छोटे गर्भ गृह का निर्माण हुआ था। दूसरे गर्भ गृह का निर्माण को लेकर मान्यता कि रियासतकाल में खुदाई में शिवङ्क्षलग को बैलगाड़ी पर ले जा रहे थे तो मन्दिर के सामने आते ही बैलगाड़ी आगे नहीं बढ पाई तो इस शिवङ्क्षलग की भी मन्दिर में स्थापना करवा दी। तब से ही एक मन्दिर में ही दो शिव परिवार विराजमान हो गए। मन्दिर के विकास के लिए समिति बनी हुई है। मन्दिर सड$क किनारे होने से मन्दिर के बाहर की तरफ दुकानों का निर्माण हो रहा है। दुकानों के किराये से मिलने वाली राशि से मन्दिर का विकास होता आ रहा है।