6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

…आखिर क्यों एक साल के बच्चे को बांधनी पड़ी पगड़ी

#Assident में तिनके की तरह बिखर गए यह परिवार...इनसे पूछो क्या होता है दर्द
2 min read
Google source verification
Bundi road accident

...आखिर क्यों एक साल के बच्चे को बांधनी पड़ी पगड़ी

बूंदी/जजावर. सड़क दुर्घटनाओं का दर्द उनसे पूछो जिन्होंने अपनों को खोया है। उन मासूमों को देखो जिन्हें संभलने के लिए पिता का सहारा भी नहीं मिला। जिले में ऐसे कई परिवार हैं जो सडक़ दुर्घटनाओं का दंश हर दिन झेल रहे हैं।

भले ही उनकी आंखों से आंसू सुख चुके हो , लेकिन अपनों को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ झलकता है । सरकार के स्तर पर समुचित व्यवस्थाओं की कमी हर किसी को खल रही है। मरने वाले परिवारों की सुनें तो उनका यही कहना है कि हाल ही में बने हाइवे पर लगातार दुर्घटनाएं बढ़ रही है। लेकिन इन दुर्घटनाओं के कारणों की तथ्यात्मक जांच करवाने वाला कोई नहीं है।

वहीं घायलों के तत्काल उपचार के लिए भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त चिकित्सा सेंटर नहीं खोला गया है। जहां हादसों के घायलों को तत्काल उपचार दिया जा सके। यही कारण है कि दुर्घटनाओं में मौतें रुक नहीं रही है।जजावर में आधुनिक ट्रोमा सेंटर खोलने की मांग


हाइवे पर घायलों को नहीं मिलता उपचार, टूट रही सांसें

राष्ट्रीय राजमार्ग 148 डी बनने के बाद से वाहनों की रफ्तार बढ़ गई। इसके साथ ही हाइवे पर हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
हालात यह है कि दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित इलाज नहीं मिल रहा है। हाइवे पर उपचार के अभाव में लोग दम तोड़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि उनियारा से जहाजपुर तक 140 किलोमीटर की दूरी में कोई भी बड़ा अस्पताल नहीं है। जहां दुर्घटना में घायलों का उपचार किया जा सके। घायलों की जिंदगी बचाने के लिए आपातकालीन सेवाओं का अभाव है।

इनके छूटे अपने


30 अप्रेल 2017 का दिन हमारे परिवार के लिए मनहूस था। देवर की शादी की तैयारियां चल रही थी। लेकिन उसके मंडप के दिन ही पति सुरेश कुमार (33) की दुर्घटना में मौत हो गई। यह बात कहते कहते सडक़ दुर्घटना का दंश झेल रही ताकला निवासी तीस वर्षीय सीमा बाई की आंखें भर आई।

पीडि़त महिला ने बताया कि दुर्घटना की खबर सुनते ही दिल घबरा गया था। पति को उपचार के लिए बूंदी लेकर गए, लेकिन हिण्डोली के पास ही उनकी सांसें टूट गई। रूंधे गले से महिला ने कहा कि मात्र एक वर्षीय पुत्र के पगड़ी का संस्कार हुआ। इतनी छोटी सी उम्र में पिता का साथ छूट गया। काश समय पर उपचार मिल जाता तो परिवार पर संकट नहीं आता।

केस-2


जजावर ताकला चौराहे पर 30 अप्रेल 2017 को मोटरसाइकिल भिडं़त में पिता भंवर लाल गुर्जर (50) गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर जीजाजी नैनवां लेकर गए, लेकिन रास्ते में कीरों के झोपड़े के यहां पिता ने दम तोड़ दिया। पिता दियाली गांव से ***** को छोडकऱ आ रहे थे। हमें नहीं पता था कि हमारे साथ उनका आखरी दिन है। यदि जजावर में ट्रोमा सेंटर होता तो शायद पिता की जान बच जाती।

केस-3


कुम्हरला निवासी हेमराज गुर्जर ने बताया कि 1 मई 2017 का दिन भूलाए नहीं भूल सकते। पिता हीरा लाल (65) अपनी सामान्य दिनचर्या को पूरा क रने के बाद निजी कार्य से बूंदी का गोठड़ा जा रहे थे। रास्ते में रोणिजा गांव के पास सामने से आ रही मोटर साइकिल से भिडं़त हो गई। गंभीर घायल अवस्था में पिता को 108 एंबुलेंस से बूंदी लेकर गए। लेकिन गोठडा के पास ही दम टूट गया।