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भोले बनेगें साक्षी… बूंदी की बेटियों की उठेगी डोली कोटा से आएगी बारात…

छोटीकाशी में गुरुवार का दिन बेहद खास होगा। यहां कि दो बेटिया परिणय सूत्र में बंधेगी जिसके साक्षी पूरे शहरवासी होगें।
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Bundi's Daughter's Doli kota from procession.

भोले बनेगें साक्षी... बूंदी की बेटियों की उठेगी डोली कोटा से आएगी बारात...

बूंदी. छोटीकाशी में गुरुवार का दिन बेहद खास होगा। यहां कि दो बेटिया परिणय सूत्र में बंधेगी जिसके साक्षी पूरे शहरवासी होगें। शादी में आम से लेकर खास सभी शामिल होगें। शहरवासियों में बेटियों की विदाई को लेकर उत्साह है।

बचपन में माता पिता गुजर जाने के बाद इनके रहनुमा बने पार्षद विश्वनाथ श्रृंगी ओर उनकी धर्मपत्नी रेखा दोनो बेटियों का कन्यादान करेगें। पूरे रीति-रिवाजों से होने वाली इस शादी में विधायक अशोक डोगरा और सभापति महावीर मोदी अपनी भागिदारी निभाएगें। अनाथ बेटियों की शादी को हर कोई खास बनाने में जुटा हुआ है।

पहले पढाया फिर हाथ पीले..


पार्षद विश्वनाथ श्रृंगी ने दोनो बटियों की परवरिश का जिम्मा उठाते हुए उन्हें 10वी तक पढ़ाया। बैरवा समाज की इन बेटियों की शादी भी समाज में बेटियों की पसंद से की जा रही है। बचपन में सिर से मां बाप का हाथ उठ गया। तीनो बहन भाई का ऐसा कोई रिश्तेदार भी नही जब ये बात विश्वनाथ को पता चली तो उन्होनें बच्चों की परवरिश का बीड़ा उठाया।

तीनों को पढ़ा लिखा कर अपने पैरो पर खड़ा किया। अब समाज में बेटियों की हाथ पीले कर अपने पिता होने की जिम्मेदारी को निभा रहें है। कोटा दशहरा मैदान और विज्ञान नगर से बारात गुरुवार को बूंदी पहुंचेगी। यहां गुरु नानक कॉलोनी स्थित शिव मन्दिर में पूरे रीति रिवाजो के साथ फेरे होगें।

तेजी से बदलती जीवनशैली ने बढ़ाई लोकप्रियता-


चेहरे पर मुस्कराहट व जीवन में शांति चाहिए, तो जीवन में योग को अपनाना ही होगा इसी फंडे को लेकर पिछले 2005 से भगवान असावा योग की अलख जगा रहे है। खास बात यह है कि इसमें पूरा परिवार लगा हुआ है। कहते है कि योग संसार के सभी लोगों के लिए ऑक्सीजन के समान है।

जीवन में योग की प्ररेणा उन्हें टीवी के माध्यम से मिली। जिसके जरिए उन्होने योग की कला भी सीखी। वे बताते है कि शहर में बाहर से निजी स्कूल में बच्चों का दल आया था जिसमें योग प्रशिक्षण की बच्चों ने डिमांड रखी लेकिन सवाल यह था कि योग कोन करवाए।

सबसे पहले धानमंडी धर्मशाला में बच्चों की योग क्लास लगाई उसके बाद उन्होनें लक्ष्य बना लिया और शहर में बच्चों और लेागों को योग प्रशिक्षण शिविर के जरिए स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते रहें।

इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से 15 अगस्त को सम्मान से नवाजा भी जा चुका है। 56 वर्षीय असावा का कहना है कि योग जीवन के हर क्षेत्र में काम आता है। उनका बेटा जयप्रकाश माहेश्वरी योग में पीएचडी की तैयारी कर रहा है।