
नैनवां (बूंदी)। जल संसाधन विभाग नैनवां उपखण्ड के अधीन आने वाले आठों बांध दुगारी, पाईबालापुरा, बंसोली, माछली, बटावदी, मोतीपुरा, गोठड़ा व रोनिजा बीस वर्षों में आधी बार से ज्यादा पूरे नही भर पाए। ऐसा हुआ है कि दीपावली तक भी चादर चल रही है। जबकि दीपावली पर तो आधे से ज्यादा बांधों से नहरों में पानी छोड़ा जाना शुरू हो जाता था। बांधों में दीपावली तक भी चादर चलने का कारण एक तो बांधों के कैचमेंट एरिया की सफाई होना और दूसरा बड़ा कारण पहली बार औसत से दो गुना बरसात होना बताया जा रहा है। पहली बार नैनवां उपखण्ड में 1600 मिमी हुई है, जो नैनवां में होने वाली औसत बरसात से दो गुणा बताई जा रही है।
वर्ष 2001 से 2020 तक का रिकार्ड खंगाला तो वर्ष 2002, 2005, 2009, 2012, 2015, 2017, 2018, 2020 ऐसे वर्ष रहे है, जिनमें सभी बांध खाली ही रह गए थे। 2006 में सिर्फ पाईबालापुरा ही भर पाया था। इन बीस वर्षों में दुगारी बांध चार बार, गोठड़ा बांध पांच बार बंसोली व बटावदी बांध 9 बार, माछली बांध पांच बार, पाईबालापुरा व मोतीपुरा बांध 13 बार व रोनिजा बांध सात बार पूरा भर पाए थे।
खेत अब भी पानी से भरे
जल संसाधन विभाग का कहना है कि पहले दीपावली पर ही रेलना व सरसों की सिंचाई के नहरों में पानी छोड़ने का कार्यक्रम तय किया जाकर पानी छोड़ दिया करते थे। इस वर्ष तो अभी खेतों में इतना गीला है कि बुवाई भी शुरू नहीं हो पा रही, जिससे बांधों में पानी की बचत रहेगी। और किसानों को मार्च तक भी सिंचाई का पानी उपलब्ध रहेगा।
इनका कहना है
जलसंसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता बीएल सेन का कहना है कि सभी बांधों के कैचमेंट एरिया में मनरेगा योजना में बांधों में पानी के आवक के अवरोधों को दूर करने व औसत से दो गुणा बरसात से अभी भी बांधों में आवक जारी रहने से अभी तक भी चादर चल रही है।
Published on:
24 Oct 2022 12:35 pm
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