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‘शिक्षा के मंदिर’ में पैसों का खेल, धड़ल्ले से हो रहे डमी एडमिशन

सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिसको लेकर शिक्षा विभाग द्वारा नामांकन एवं प्रवेश प्रक्रिया के लिए गाइडलाइन भी जारी की जा चुकी है।

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बूंदी

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Kirti Verma

Jul 05, 2023

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बूंदी. सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिसको लेकर शिक्षा विभाग द्वारा नामांकन एवं प्रवेश प्रक्रिया के लिए गाइडलाइन भी जारी की जा चुकी है। लेकिन कुछ शैक्षणिक संस्थान डमी एडमिशन देकर बच्चों के साथ तो धोखा कर रहे है, वहीं नियमों के खिलाफ जाकर शिक्षा विभाग को भी ठेंगा दिखा रहे है। शिक्षा विभाग भी कार्रवाई के नाम पर मौन साधे हुए है।

जानकारी के अनुसार 26 जून से इस सत्र के लिए राजकीय विद्यालयों सहित गैर सरकारी विद्यालयों में भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह जुलाई के अंत तक चलेगी। कई निजी शैक्षणिक संस्थाएं, जिनके पास माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय स्तर की मान्यता नहीं है। बावजूद वे नियमों की अनदेखी करते हुए डमी एडमिशन के रूप में कक्षा नवीं, दसवीं में प्रवेश दे रहे हैं। अभिभावक भी शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता संबंधी पत्रावलियां नहीं देख रहे है।सीधे ही बच्चों को घोर अंधकार में धकेल रहे है। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भी उठाना पड़ सकता है।

यहां हो रहा डमी एडमिशन का खेला
सूत्रों के मुताबिक जिले में पेच की बावड़ी, बड़ा नयागांव, सथूर, अलोद, बूंदी, लाखेरी, केशवरायपाटन, कापरेन, नैनवां सहित कई शहरों में डमी एडमिशन धड़ल्ले से दिए जा रहे हैं।

जिम्मेदारों का कहना...
फिलहाल इस मामले को लेकर शिकायत नही आई है। यदि ऐसा मामला सामने आता है तो संबन्धित विद्यालय पर ठोस कारवाई होगी।
राजेन्द्र कुमार व्यास, जिला शिक्षा अधिकारी (मु.) माध्यमिक, बूंदी


कोचिंग संस्थान भी कूट रहे चांदी
डमी इसमें बच्चे का दाखिला स्कूल में होता है और बच्चा उस स्कूल में आने की बजाय बाहर किसी ट्यूशन इंस्टीट्यूट से पढ़ाई करता हैै। उसकी हाजिरी स्कूल में लगती है। इसकी एवज मेें अभिभावक स्कूल को सामान्य से अधिक पैसे देते हैैं और ट्यूशन इंस्टीट्यूट को अलग से पैसे देते हैं। इसमें अभिभावक इसलिए खुश हो जाते हैं कि उनके बच्चे को स्कूल की नियमित पढ़ाई की बजाय एक अच्छे इंस्टीट्यूट से शिक्षा मिलती है और बच्चा उनका बाकी विद्यार्थियों से ज्यादा नंबर लेकर पास हो रहा है। अधिकतर निजी स्कूलों में मेरिट लाने वाले बच्चे ऐसे ही इंस्टीट्यूट मेें पढ़ते हैं। सूत्रों की मानें तो अब कुछ सरकारी स्कूल के बच्चे भी इसी तरह शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं क्योंकि सरकारी में फीस न के बराबर है।

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मान्यता आठवीं की, प्रवेश 9वीं से 10वीं तक
जिले के कई ऐसी गैर सरकारी संस्थाएं हैं। जिनके पास मान्यता तो केवल आठवीं तक की है, लेकिन नियमों को धता बताते हुए एवं शिक्षा विभाग की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए नवी एवं दसवीं में प्रवेश दिए जा रहे है। ऐसे ही जिन शैक्षणिक संस्थानों के पास माध्यमिक स्तर की मान्यता है। ये संस्थाएं 11वीं एवं 12वीं में विद्यार्थियों को डमी एडमिशन के रूप में प्रवेश दे रहे हैं। जिन्हें कोई रोकने वाला है, न टोकने वाला है।

दूसरे विद्यालयों से कर रहे करार
जिन शैक्षणिक संस्थानों के पास मिडिल स्तर की मान्यता है ऐसे दर्जनों गैर सरकारी विद्यालय अन्य गैर सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संचालकों से करार कर बच्चों को उनके संस्थानों में डमी एडमिशन दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कहीं राजकीय विद्यालय के विद्यार्थी भी डमी एडमिशन के रूप में गैर सरकारी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं।

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