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नकलें नहीं मिली तो किसानों का फूटा रोष

कई दिनों तक चक्कर लगाने के बावजूद खसरा गिरदावरी की नकलें नहीं देने पर मंगलवार को किसानों का

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False Fury of Farmers Not Found

नैनवां. कई दिनों तक चक्कर लगाने के बावजूद खसरा गिरदावरी की नकलें नहीं देने पर मंगलवार को किसानों का रोष फूट पड़ा। किसानों ने दो बार तहसील कार्यालय में घुसकर हंगामा किया। नायब तहसीलदार का घेराव कर खरी-खरी सुनाई। हंगामें को रोकने के लिए प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी तथा तहसील कार्यालय में सात काउंटर बनाकर किसानों को नकलें उपलब्ध कराई। उसके बाद ही किसान शांत हुए।
समर्थन मूल्य पर चने व सरसों की फसलें बेचने के लिए गिरदावरी की नकलें लेने तहसील कार्यालय में मंगलवार सुबह से ही किसान पहुंचना शुरू हो गए थे। 11 बजे बाद तो तहसील कार्यालय परिसर में नकलें लेने आए किसानों का मेला लग गया। 11 बजे तक भी पटवारी तहसील में नहीं आए तो किसानों का रोष फूट पड़ा। किसान तहसील कार्यालय के अन्दर घुसकर हंगामा करने लगे। नायब तहसीलदार द्वारा एक घंटे में नकलें देने का कार्य शुरू कराने के आश्वासन के बाद किसान बाहर निकल गए। दो घंटे बाद भी नकलें जारी नहीं करने पर किसानों ने डेढ़ बजे वापस तहसील कार्यालय में घुसकर हंगामा कर दिया। पुलिस ने किसानों को समझाकर स्थिति संभाली। किसानों ने हंगामा तो बंद कर दिया लेकिन नकलें जारी होने का कार्य शुरू होने तक कार्यालय से बाहर निकलने से मना कर दिया। जिससे पूरा तहसील कार्यालय किसानों से अटा रहा। नायब तहसीलदार द्वारा अपनी निगरानी में नकलें जारी करने का कार्य शुरू कराने के बाद ही किसान बाहर निकले।

किसानों ने बताई पीड़ा
करीरी गांव के किसानों ने बताया कि आठ-आठ दिन से घूम रहे हैं, लेकिन पटवारी नकलें जारी नहीं करता और अधिकारी भी नहीं सुन रहे। हीरापुर के किसानों ने बताया कि उनके हलके के पटवारी को तीन दिन से ढूंढ रहे हैं, पटवारी ही नहीं मिल रहा। कांकरिया गांव के किसानों ने बताया कि करवर नायब तहसील में चार दिन से चक्कर काट रहे हैं। सोमवार को नायब तहसीलदार ने नैनवां पहुंचकर नकलें लेने की बात कही, लेकिन यहां कोई नकलें देने वाला ही नहीं है। किसान संघ करवर मंडल के अध्यक्ष राजेन्द्र नागर ने बताया कि किसान आठ-आठ दिनों से चक्कर काट रहे हैं। पटवारी मिलते नहीं और अधिकारी सुनते नहीं।