बूंदी. कहते हैं अगर हौसले बुलंद हो तो कोई सफल होने से नहीं रोक सकता है। अपने बुलंद हौसले के चलते केशवरायपाटन निवासी दिव्यांग हरिओम नामा ने सफलता की इबारत लिख डाली। कभी जिसे छात्र के रूप में वाणिज्य वर्ग विषय को लेने से मना कर दिया था, उसी विषय में व्याख्याता बनकर नामा ने दिव्यांगों के लिए एक नजीर पेश की।
दिव्यांग नामा ने बताया कि वर्ष १९८२ में जब वह कक्षा नौ में अपने मनपंसद वाणिज्य विषय लेने राजकीय सीनियर सैकण्डरी विद्यालय केपाटन गए तो विषय व्याख्याताओं ने शारीरिक दिव्यांगता (दृष्टि बाधित) होने की वजह से विषय देने से मना कर दिया, लेकिन उसका विश्वास कम नहीं हुआ और मनपंसद विषय लेने व उसी विषय में शिक्षक बनने का दृढ़ निश्चय किया। पिता के सहयोग से वाणिज्य विषय मिल गया और वह अपने लक्ष्य को पाने में जुट गए। आखिरकर २१ जुलाई २०१५ को वाणिज्य विषय में व्याख्याता बनकर अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। अब वे शिक्षक के रूप में असक्षम लोगों को एक नई दिशा दे रहे हंै।