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छोटीकाशी में बांधों व नदियों की मेहरबानी, सालभर बहता है पानी

हाड़ौती अंचल जलस्रोतों के मामले में सदियों से समृद्ध रहा है। बूंदी जिला जल उपलब्धता के मामले में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भौगोलिक दृष्टि से बूंदी सम चतुर्भुज आकर का है, जो उत्तर पूर्व तक पहाडिय़ों से घिरा हुआ है।

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छोटीकाशी में बांधों व नदियों की मेहरबानी, सालभर बहता है पानी

जल भराव

बूंदी.गुढ़ानाथवतान. हाड़ौती अंचल जलस्रोतों के मामले में सदियों से समृद्ध रहा है। बूंदी जिला जल उपलब्धता के मामले में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भौगोलिक दृष्टि से बूंदी सम चतुर्भुज आकर का है, जो उत्तर पूर्व तक पहाडिय़ों से घिरा हुआ है। इसके पूर्वी भाग में बहने वाली सदानीरा चंबल नदी जिले की जीवन रेखा है, जिसकी नहरों से केशवरावपाटन व तालेड़ा तहसील क्षेत्र की कृषि भूमि ङ्क्षसचित होती है। चंबल नदी कोटा व बूंदी जिले की सीमा निर्धारित करती है। इसी प्रकार बूंदी के दक्षिणी पश्चिमी भाग से निकलने वाली मेज नदी भीलवाड़ा जिले की सीमा बनाते हुए रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बीच में से निकलते हुए लाखेरी के पास चंबल में मिलती है। मेज नदी को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व की जीवन रेखा भी कहा जाता है। अन्य नदियों में मांगली, घोड़ा पछाड़, ऐरू, कुरेल, चंद्रभागा, बाणगंगा आदि सदियों से कलकल निनाद करते हुए बह रही है। शहर सहित पूरे जिले में रियासतकालीन कलात्मक बावडिय़ां भी जल संरक्षण का बेहतरीन नमूना पेश करती है।
जिले के वन क्षेत्र व पहाड़ी इलाकों में परम्परागत जलस्रोतों पर पानी की उपलब्धता मूक प्रणियों के जीवन का आधार बने हुए हैं। जिले में रामगढ़-विषधारी वन्यजीव अभयारण्य में मेज नदी के अलावा दो दर्जन प्राकृतिक जल-स्रोत हैं। जिनमें 12 माह पानी रहता है।
आस्था का केंद्र बने जल-स्रोत
जिले में पहाड़ी चोटी पर स्थित कालदां माताजी का स्थान प्रमुख है,जहां भीषण अकाल में भी पानी का एक बड़ा दह भरा रहता हैं तथा प्राकृतिक रूप से यहां चट्टानों से पानी निकलता है। इसी कारण इसका नाम कालदह पड़ा जो अब कालदां वन खण्ड के रूप में जाना जाता है। इसी पहाड़ी पर उमरथुणा के निकट केकत्या महादेव, सथूर के निकट देवझर महादेव, आम्बा वाला नाला, डाटूंदा के पास दुर्वासा महादेव, पारा का देवनारायण, नारायणपुर के पास धूंधला महादेव, खीण्या-बसोली के पास आम्बारोह, भीमलत महादेव, नीम का खेड़ा के पास झरोली माताजी, खेरूणा के नीलकंठ महादेव आदि स्थान सदाबहार जलयुक्त होने के कारण सदियों से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहे व आज तक आस्था के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। इसी प्रकार जिले के रामगढ़ विषधारी वन्यजीव अभयारण्य में रामेश्वर महादेव, झर महादेव, डोबरा महादेव, गेंद का महादेव, धूंधलेश्वर महादेव, खेळ का महादेव, माण्डू का महादेव आदि स्थान जल के कारण ही प्रमुख आस्था-धाम बने हुए हैं।
उत्तम आश्रय स्थल होंगे सिद्ध
राज्य के चौथे टाइगर रिजर्व के रूप में बूंदी के जंगल टाइगर के लिए उत्तम आश्रय स्थल सिद्ध होंगे तथा बूंदी जिले के युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। बूदी के रामगढ़ अभयारण्य सहित सभी जंगलों में सांभर, चीतल व जंगली सुअरों जैसे शाकाहारी वन्यजीवों की तादात में निरंतर इजाफा हो रहा है,जो बाघों के लिए अच्छा प्रे-बेस सिद्ध होंगे।