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International yoga day Special: योग को बनाया जीवन जीने का तरीका नि:स्वार्थ सेवा कर रहे है, छोटीकाशी के ये `योगी`

योग की साधना में तल्लीन शहर के ही कुछ ऐसी शख्सियत है जो स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाते हुए
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International yoga day Special bundi

International yoga day Special: योग को बनाया जीवन जीने का तरीका नि:स्वार्थ सेवा कर रहे है, छोटीकाशी के ये `योगी`

बूंदी. मन को शरीर से जोडऩे का काम करता है योग। जीवन सहजता और सरलता का प्रादुभाव योग से होता है। योग की साधना में तल्लीन शहर के
ही कुछ ऐसी शख्सियत है जो स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाते हुए
आसन और योग क्रिया में नि:स्वार्थ योग का प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य के प्रति लोगों को सचेत कर ाुद को व दूसरों को प्रसन्नचित महसूस करा रहें हैै। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एक रिपोर्ट...

यहां मिलता है खुश रहने का मंत्र-


आज से कई वर्ष पहले मैंने योग को शहर में व्यापक रूप से आगे बढ़ाने की योजना तैयार की। शुरुआत में लोग योग के बारे में भ्रांतियों के कारण घबराते थे। प्रयास जारी रहा और एक के बाद एक शिविर लगाए, लोग जुड़ते गए। यह कहना है पतंजलि के न्याय विद संगठन संयोजक एडवोकेट अनुराग शर्मा का।

वे वकालात के बावजूद बाबा रामदेव के पतंजलि से जुड़े और हरिद्वार के आवासीय शिविर में भाग लेने के बाद से योग को जीवन में आत्मसात कर लिया। योग में पूरा विश्वास रखने वाले शर्मा का कहना है कि योग से बीमारियों को 100 फीसदी दूर किया जा सकता है।

2001 से वे योग से जुड़े हुए है। पहले हरिद्वार में बाबा रामदेव से खुद प्रशिक्षण लिया। फिर योग कक्षाओं के माध्यम से लोगो को योग से जोडऩे की कोशिश की। उनका कहना है कि नित नई बीमारियों के चलते अब लोगो में योग के प्रति जागरूकता आने लगी है।



तेजी से बदलती जीवनशैली ने बढ़ाई लोकप्रियता-


चेहरे पर मुस्कराहट व जीवन में शांति चाहिए, तो जीवन में योग को
अपनाना ही होगा इसी फंडे को लेकर पिछले 2005 से भगवान असावा
योग की अल ा जगा रहे है। खास बात यह है कि इसमें पूरा परिवार लगा हुआ है। कहते है कि योग संसार के स ाी लोगों के लिए ऑक्सीजन के समान है। जीवन में योग की प्ररेणा उन्हें टीवी के माध्यम से मिली। जिसके जरिए उन्होने योग की कला भी सीखी।


वे बताते है कि शहर में बाहर से निजी स्कूल में बच्चों का दल आया था जिसमें योग प्रशिक्षण की बच्चों ने डिमांड रखी लेकिन सवाल यह था कि योग कोन करवाए। सबसे पहले धानमंडी धर्मशाला में बच्चों की योग क्लास लगाई उसके बाद उन्होनें लक्ष्य बना लिया और शहर में बच्चों और लेागों को योग प्रशिक्षण शिविर के जरिए स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते रहें। इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से 15 अगस्त को स ाान से नवाजा भी जा चुका है। 56 वर्षीय असावा का कहना है कि योग जीवन के हर क्षेत्र में काम आता है। उनका बेटा जयप्रकाश माहेश्वरी योग में पीएचडी की तैयारी कर रहा है।

योग से भागते है रोग -

योग क्या होता है और इसके क्या फायदे हैं यह जानना हो तो 69 साल के
राधेश्याम साहू से मिले। रोडवेज में बूकिंग क्लर्क के पद से रिटायर्ड साहू को मोटापे के साथ कई बीमारियों ने घेर लिया था लेकिन अब वे बिलकुल फिट है। 2006 से योग से जुड़े राधेश्याम नियमित दो घंटे योग करते है।

उम्र के इस पड़ाव में तंदुरुस्त और स्वस्थ रहने वाले राधेश्याम ने अपना जीवन अब योग में समर्पित कर दिया यही वजह है कि कोई भी मौसम हो उनकी नियमित योग प्रशिक्षण में लोगो को योग के लिए प्रेरित करते है। न्यू कॉलोनी में सामुदायिक भवन में नियमित योगा करवाते है। उनका वजन 45 किलो है जिसे सालों से मेंटेन किया हुआ है।

वे बताते है कि स्वस्थ्य रहने के लिए योग बहुत जरूरी है। यदि योग करेंगे, तो क ाी बीमार नहीं होंगे। हर काम को करने में तेजी आती है। खान -पान में मिलावट है, उससे बचने के लिए योग जरूरी है। प्रतिदिन कम से कम तीस मिनट योग करना चाहिए। योग से बीमारी जड़ जाती है, बस शर्त है नियमित करें।


योग के फायदे
तनावों से मुक्ति
नई ऊर्जा का संचार
एकाग्रता का समागम
रोगों से बचाव, आयु की वृद्धि।
दिनचर्या सुव्यवस्थित
तेज और बल की प्राप्ति
स्मरण शक्ति तेज