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holi special:यहां बसंत पंचमी से फूल डोज तक रहता है, रंगोत्सव का माहौल…विदेशी पर्यटको का लगता है जमावड़ा…

परम्पराओं के रंग में घुलने विदेशी पर्यटक...

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#khulkarkheloholi: chhotee kashee Holi in foreign

बूंदी. छोटी काशी के गोपालजी मंदिर में 37 दिनों होली की खुमारी देखने को मिलती है। प्राचीन समय मेंं गोपालजी को पलाश के फूलों से होली खेलाई जाती थी इसके लिए तलवास के जंगलों से फूल लाए जो थे जो होद में डालकर उनसे निकले केसरियां रंगो से होली खेली जाती थी।

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गोपालजी को रंग इतने प्रिय थे कि कहा जाता था कि...छूटे न रंग ऐसी रंग दे चुनरिया धोबनियां धोए चाहे सारी उमरिया...सोने चांदी की पिचकारियों से रंगो की बौछार देखते ही बनती थी। पंडित मधुसूदन शर्मा बताते है कि समय के साथ अब सब कुछ बदल गया। गुलाल और अबीर, फूलों से होली खेलते है। परम्परा को कायम करते हुए बसंती पंचमी से फूल डोल यानि 37 दिनों तक यहां होली की धूम रहती है प्रतिदिन सुबह मंगलाआरती और प्रसादी का वितरण किया जाता है। बड़ी संख्या में महिलाए विदेश प्रर्यटक होली का आनंद लेते है।

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वे बताते है कि औरगंजेब के समय आक्रामण के बाद कोटा मथुराधीश और बूंदी गोपालजी जो वल्लभसमप्रदाय प्रथम पीठ मंदिर है। बूंदी आ गए। बाद में एक सेवा कोटा चली गई। केसर के रंग के छापो की परम्परा-छोटी काशी में भगवान के नाम पर केसर के रंगो से छापों की परम्परा थी जो समय के साथ खत्म हो गई।

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परम्पराओं के रंग में घुलने लगे विदेशी...

पर्यटन नगरी बूंदी में यूं तो विदेशियों का जमघट लगा रहता है लेकिन होली पर यहां विशेष रूप से पर्यटक रंगो में डूबे नजर आते है। चंग की थाप पर होली के गीतो की मस्ती के साथ विदेशी पर्यटक होली को खूब एजॉय करते है।