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कॉलोनी को सड़क की दरकार, खुले में शौच जाने पर मजबूर

- सीवरेज का कार्य बना जी का जंजाल-वार्ड १८ गायत्री नगर के बाशिंदों की पीड़ा
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kolonee ko sadak kee darakaar, khule mein shauch jaane par majaboor

कॉलोनी को सड़क की दरकार, खुले में शौच जाने पर मजबूर

बूंदी.कॉलोनी को बने तीन वर्ष से अधिक समय हो गया, लेकिन सड़क अभी तक यहां के बाशिंदों को नसीब नहीं हुई। घरों के कनेक्शन अभी तक नहीं जोड़े गए, जिसके चलते घरों का सारा पानी कॉलोनी में खाली पड़े भू-खंडों में जमा रहने लगा है। इससे मौसमी बीमारियों का अंदेशा बना रहने लगा है। यह पीड़ा है वार्ड १८ के गायत्री नगर रोड स्थित आकांक्षा नगर के बाशिंदों की।
कॉलोनी में सीवरेज का कार्य लोगों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। ठेकेदार की ओर से बीच में सीवरेज का आधा-अधूरा निर्माण कार्य छोड़ दिया गया है। जिसके चलते आने जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी में नालियों का निर्माण नहीं होने से रोड पर पानी का फैला रहने लगा है। जिससे मच्छर पनप रहे हैं। कॉलोनी में पक्की सड़क का निर्माण तक नहीं हुआ है। जिसके कारण आए दिन वाहन चालक चोटिल हो रहे है। घर के बाहर छोटे बच्चों का खेलना दुश्ïवार हो रहा है। कई बार बच्चे भी गिरकर चोटिल हो चुके है।
उग रही झाडिय़ां, बढ़ रही परेशानी
बाशिंदों ने बताया कि कॉलोनी में खाली पड़े भू-खंडों में बड़ी-बड़ी झाडिय़ां उगी हुई है। जिसमें बारिश का पानी भरा रहने के कारण दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। घर से बाहर निकलते ही मुंह पर रुमाल लगाना पड़ रहा है। जहरीले कीड़ों का डर बना रहता है। खाली भूखंडों के पास से गुजरना भी मुश्किल है। कई बार शिकायत करने के बाद भी इस ओर किसी का भी ध्यान नही गया है।
बाशिंदों की जुबानी...
कॉलोनी में गंदगी का आलम बना रहता है। समय-समय पर कचरा भी नहीं उठता है। गंदगी के बीच लोगों को रहना पड़ रहा है। इसकी शिकायत भी दर्ज करा रखी है।
विनय मलिक
कॉलोनी के आस-पास चारों तरफ गंदा पानी भरा रहता है। जिसमें मच्छर पनपते रहते हैं और मौसमी बीमारियों का अंदेशा बना रहने लगा है। कॉलोनी की सफाई भी कभी-कभी ही होती है।
मोहनलाल
कॉलोनी में स्वच्छता कहीं नजर नहीं आती। घरों में शौचालय नहीं होने से महिला-पुरुषों को अभी भी खुले में शौच जाना पड़ रहा है।
संजू बाई
कॉलोनी में नालियों का निर्माण नहीं होने से पानी का निकास नहीं हो पाता है। हर रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
पृथ्वीराज चीता