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अब बांध का पानी नहीं बहेगा व्यर्थ, नहरों की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत

बरधा बांध की नहरों से लगे किसानों को अब फ सलों के लिए बांध का पूरा पानी मिलेगा।

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No longer will the water of the dam be wasted, the amount approved fo

नमाना. बरधा बांध की नहरों से लगे किसानों को अब फ सलों के लिए बांध का पूरा पानी मिलेगा। सरकार ने 12 करोड़ पचास लाख रुपए नहरों की मरम्मत के लिए स्वीकृत किए हैं। नहरों का कायाकल्प होने के बाद बांध का पानी अब व्यर्थ नही बहेगा। जल संसाधन विभाग ने नहरों का काम भी शुरू करवा दिया है।

एक्वाडक्ट की भी होगी मरम्मत
दांई व बाई नहर पर बने करीब आधा दर्जन एक्वाडक्ट की भी मरम्मत होगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक्वाडक्ट की दुर्दशा हो रही है। जिसके तहत इनका कार्य करवाया जा रहा है। नहर के साथ एक्वाडक्ट सही होने से किसानों को इसका पूरा लाभ मिलेगा।

हर वर्ष टूटती है नहर
बरधा बांध की नहरों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि पिछले 10 वर्षों से लगातार जल प्रवाह के दौरान नहर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। ऐसे में अधिकारी भी पानी का वैग बढ़ाने में कतराते थे। जिसके चलते टेल क्षेत्र के किसानों को पूरा नहरी पानी नहीं मिला। लंबे समय से नहर की मरम्मत की मांग क्षेत्र के लोग उठा रहे थे। इस वर्ष बजट मिलने के बाद नहरों का कायाकल्प शुरू हुआ है।
बंूदी विधायक अशोक डोगरा का कहना है मेरे विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण तीनों जल परियोजनाओं का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। गरड़दा बांध का निर्माण कार्य तो पिछले वर्ष शुरू करवा दिया था। वही बरधा बांध की नहरों के मरम्मत बजट के लिए भी प्रयास किए। अभयपुरा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य शुरू करवा दिया है।

बरधा बांध परियोजना खण्ड के अधिशासी अभियंता हेमंत शर्मा का कहना है कि बरधा बांध की नहरों के लिए 12 करोड़ 50 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। नहरों के कायाकल्प का काम शुरू करवा दिया। ठेकेदार को कार्य गुणवत्तापूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। समय-समय पर निर्माण कार्य की निगरानी की जा रही हैं।

तालाब में डाल रखी गंदगी, कर रहे अतिक्रमण
नोताड़ा. नोताड़ा गांव स्थित भैरूसागर तालाब अतिक्रमण व गंदगी के कारण अपना स्वरूप खोता जा रहा है। तालाब के आसपास बसे लोगों ने तालाब के किनारे पर अतिक्रमण कर इसमें कचरा डाल रहे है जिससे पानी दूषित हो रहा है।
ग्रामीण ज्ञान सिंह मीणा, नरेश बैरवा ने बताया कि रियासतकाल में निर्मित इस तालाब में बरसात के पानी की अच्छी आवक होने से यह वर्ष पर्यन्त भरा रहता था। जिससे क्षेत्र का भूजल स्तर पर्याप्त बने रहने के अलावा मवेशियों को पेयजल उपलब्ध हो जाता था। लेकिन कुछ वर्षों से तालाब के किनारे पर बसे कुछ लोगों ने बाड़े बना लिए और पानी की आवक के रास्ते अवरुद्ध कर दिए। साथ ही तालाब में गंदगी डालने से पानी दूषित हो रहा है। ऐसे में पानी का सदुपयोग भी नहीं हो पा रहा है। रामसिंह चौधरी ने बताया कि चार साल पहले तालाब को अतिक्रमण मुक्त करवा दिया गया था, लेकिन फिर से तालाब अतिक्रमण की चपेट में है।