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डेढ़ किमी सड़क नहीं बनी, किसान लगा रहे 35 किमी का चक्कर

क्षेत्र के आजन्दा ग्राम पंचायत से जुड़े देवपुरा गांव में अब तक भी पक्की सड़क नहीं होने और रास्ते में आलन की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Sep 08, 2025

डेढ़ किमी सड़क नहीं बनी, किसान लगा रहे 35 किमी का चक्कर

कापरेन. देवपुरा जाने वाला आलन का कच्चा रास्ता जिसमें ग्रामीण सामान्य दिनों में आवागमन करते हैं।

कापरेन. क्षेत्र के आजन्दा ग्राम पंचायत से जुड़े देवपुरा गांव में अब तक भी पक्की सड़क नहीं होने और रास्ते में आलन की पुलिया क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बोयाखेड़ा के किसानों को खेतों में आने जाने के लिए 35 किमी का चक्कर काटना पड़ रहा है। आवागमन के रास्ते के अभाव में देवपुरा से कई परिवार पलायन कर चुके और अब यहां दस घरों की बस्ती में करीब चार दर्जन से अधिक लोग रह रहे हैं।

ग्रामीण सर्दी और गर्मी में कच्चे रास्ते पर बिना पुल वाले आलन के खाळ से आवागमन करते हैं। वहीं बारिश के दौरान आलन की पुलिया पर पानी होने से डेढ़ किमी दूर देवली गांव से पीने का पानी लेकर आते हैं। खेतों में बने कच्चे रास्ते से होकर आवागमन करते हैं। ग्राम पंचायत उपसरपंच कृष्ण मुरारी गुर्जर देवपुरा निवासी मांगीलाल व रामस्वरूप मीणा ने बताया कि गांव में कोई व्यक्ति बीमार है या गर्भवती महिलाएं तो उसे सड़क के अभाव के कारण अपने रिश्तेदारों के यहां रखना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि देवपुरा में आजादी के सात दशक बाद भी डामर सड़क नहीं बनी है। ग्रामीण बारिश के दौरान गांव से डेढ़ किमी दूर देवली गांव में अपने वाहनों को छोड़ते हैं और सड़क नहीं होने से पैदल खेतों से गुजरते है। उपसरपंच ने बताया कि देवपुरा का सबसे नजदीकी गांव बोयखेड़ा है, जिसकी बोयाखेड़ा से दूरी डेढ़ किलोमीटर है। दोनों गांवों के बीच रास्ते में आलन का खाळ है और ग्रामीणों को देवपुरा में जाने के लिए आलन के खाळ से होकर गुजरना पड़ता हैं। बारिश में देवपुरा का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है।

कैसे रहे फसलों की सुरक्षा
उपसरपंच ने बताया कि बोयाखेड़ा के किसानों की करीब दो हजार बीघा जमीन देवपुरा गांव में है। रास्ते के अभाव में बोयाखेड़ा के किसान खेती के लिए जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टरों को आलन के खाळ से निकालते हैं। खाद, बीज को बड़ी मशक्कत से खेतों तक पहुंचाते हैं। बोयाखेड़ा के किसान रास्ते के अभाव में खरीफ की फसल नहीं कर पाते हैं। फसल तब घर पहुंचा पाते है, जब देवली के किसानों की फसल कटाई हो जाती हैं और खेत खाली हो जाते हैं। बोयाखेड़ा के किसान अपनी फसल को देवली से कापरेन होते हुए 35 किमी का सफर तय कर बोयाखेड़ा तक पहुचा पाते हैं। रास्ता खराब होने से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी है। कई बार किसानों की उपज से भरी ट्रॉलियां खाळ में पलटी मार गई है।

किसी ने नहीं सुनी पुकार
देवपुरा में पीने योग्य पानी नही होने से ग्रामीण महिलाए डेढ़ किमी कीचड़ भरी राह का सफर तय करते हुए आलन के खाळ को पार कर बोयाखेड़ा से पीने का पानी लेकर आते है, लेकिन बारिश के समय में रास्ता अवरुद्ध हो जाने पर डेढ़ किमी दूर देवली गांव से पैदल खेतों की मेड़ के रास्ते से पीने का पानी लाकर प्यास बुझाते है। ग्रामीणों ने बताया कि समस्या को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को भी अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई राहत नही मिली है।ग्रामीणों ने आलन की पुलिया पक्की करवाने, सड़क बनवाने की मांग की है।