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#Patrika campaign : सुनो सरकार…हमारा कॉलेज सरकारी हो लंबे समय से मांग, हर बार निराशा लग रही हाथ

नैनवां कस्बे के स्व वित्तपोषी भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा महाविद्यालय को सरकारी करने की मांग

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#Patrika campaign: College demanded to do government

बूंदी /नैनवां. कस्बे के स्व वित्तपोषी भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा महाविद्यालय को सरकारी करने की मांग लम्बे समय से हो रही है। इसके बावजूद सरकार आमजन की मांग को लेकर गम्भीर नहीं है। सभी दल के नेता सरकारी कॉलेज की आवश्यकता तो बताते हैं, लेकिन इस मांग को पूरा करने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।


सरकार के सामने ऐसी क्या परिस्थिति आ गई थी कि सरकारी होने के एक वर्ष बाद ही सरकार ने महाविद्यालय को वापस स्व वित्तपोषी कर दिया। जब-जब भी राज्य सरकार बजट पारित करती है तो पूरा नैनवां उपखंड इस उम्मीद के साथ बजट देखता है कि हमारा कॉलेज भी सरकारी होगा। 2014 के बाद सरकार ने तीन बार बजट पेश किया और तीनों में ही नैनवां को निराश किया। सरकार छोंटे-छोटे कस्बों में सरकारी कॉलेज खोलती जा रही हैं, लेकिन नैनवां में विधायक विपक्ष का होने से यहां की उपेक्षा करती आ रही है।

सरकार बदलते ही छीन लिया सरकारी दर्जा

नैनवां में महाविद्यालय की मांग को देखते हुए 15 वर्ष पूर्व 2003 में स्व वित्त पोषी महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। तीन वर्ष में महाविद्यालय को सरकारी दर्जा देने के हिसाब से राजकीय महाविद्यालय के नाम से भूमि आरक्षित की गई। आरक्षित भूमि पर 19 अप्रेल 2003 को दिवंगत सांसद रघुवीर सिंह कौशल, पूर्व ससंदीय सचिव ममता शर्मा, उस समय रहे जिला कलक्टर आशुतोष शर्मा व विधायक प्रभूलाल करसौल्या ने शिलान्यास किया। 21 जुलाई 2003 को महाविद्यालय की स्थापना हुई।


दस वर्ष बाद 26 जुलाई 2013 को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा राज्याधीन लेकर सरकारी कॉलेज घोषित किया गया। 2013 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन हिण्डोली-नैनवां विधानसभा सीट कांग्रेस की झोली में चली गई। सरकार ने एक वर्ष तक सरकारी रहने के बाद 26 सितम्बर 2014 को महाविद्यालय को वापस स्ववित्तपोषी कर 18 दिसम्बर 2014 को महाविद्यालय विकास समिति के सुपर्द कर दिया।

सरकारी समिति में फिर भी...
स्ववित्त पोषी महाविद्यालय को संचालित करने के लिए समिति का जो गठन हो रहा है उसमें स्वयं खाद्यमंत्री बाबूलाल वर्मा, सांसद ओम बिरला व सुभाष बहेडिय़ा सदस्य हैं। उपखंड अधिकारी इसके अध्यक्ष है। सरकार के इतने बड़े जनप्रतिनिधि सदस्य होने के बाद भी महाविद्यालय को सरकार सरकारी दर्जा नहीं दे पा रही। इसके अलावा विधायक अशोक चांदना, नैनवां नगर पालिकाध्यक्ष मधुकंवर, पंचायत समिति प्रधान प्रसन्नबाई मीणा, पूर्व विधायक सूर्यकुमार जैन, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हेमराज नागर, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रमोद जैन, सम्पत कुमार जैन सहित उपखंड के कई जनप्रतिनिधि भी सदस्य हैं।


आजादी के पहले का उपखंड मुख्यालय जिले में उच्च शिक्षा के संस्थानों पर नजर डाले तो जिला मुख्यालय के अलावा एक भी उपखंड उपखंड मुुख्यालय पर सरकारी कॉलेज नही है। नैनवां जिले का सबसे पुराना उपखंड मुख्यालय है। उपखंड की दो लाख की आबादी है।

हर पंचायत मुख्यालय पर सीनियर सैकण्डरी स्कूल है। सीनियर पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए इस स्ववितपोषी महाविद्यालय में पांच गुना ज्यादा फीस देकर प्रवेश लेना पड़ता है या फिर बूंदी या टोंक के सरकारी महाविद्यालयों में पढऩे जाना पड़ता है।
कमजोर आर्थिक स्थिति के छात्र व बेटियों के उच्च शिक्षा प्राप्त करने के कदम आगे नहीं बढ़ पाते।