4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

#PATRIKA CAMPAIGN: अब पोस्टकार्ड लिख सरकार तक पहुंचाई अपनी बात…

कॉलेज को सरकारी कराने की मांग को लेकर एबीवीपी ने पोस्टकार्ड लिखो अभियान शुरू किया शुरू
2 min read
Google source verification

बूंदी/नैनवां. कॉलेज को सरकारी कराने की मांग को लेकर एबीवीपी की ओर से शुक्रवार से पूरे उपखंड में पोस्टकार्ड लिखो अभियान शुरू किया गया।
नैनवां के शिक्षाविद् सेवानिवृत प्रधानाचार्य सत्यनारायण स्वामी, नाथूलाल निर्मल, भवानी सिंह सोलंकी व राधेश्याम सैनी ने पोस्टकार्ड लिखकर अभियान का शुभारम्भ किया।

Read More: सरकारी कॉलेज के लिए दौड़े गुरूजी से लेकर जनप्रतिनिधि...

शिक्षाविद् ने कहा कि कि सरकारी कॉलेज की मांग के लिए गांव-गांव जाकर जन जागरण करेंगे। सरकारी महाविद्यालय हमारी मुख्य आवश्यकता है। इसके लिए संघर्ष जारी है। इसके लिए जरूरत पड़ी तो अनशन पर भी बैठने को तैयार हैं। कॉलेज सरकारी होगा तो कोई भी बेटा-बेटी को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहना पड़ेगा।

Read More: # Patrika campaign:शहर के बच्चो को मिले उच्च शिक्षा... पवित्र माह में रोजेदारों ने अकीदत से मांगी दुआ...

अभियान के संयोजक जितेन्द्र सिंह सोलंकी, विद्यार्थी विकास प्रकल्प के जिला संयोजक दिलखुश पोटर, जिला छात्रावास प्रमुख भंवरलाल सैनी, तहसील सहसंयोजक ओपी मीणा, दिनेश नागर, विनोद नागर ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षाविदें, अभिभावकों, छात्र-छात्रओं, वरिष्ठजनों, नवयुवक मंडल, स्वयंसेवी संगठनों के पदाधिकारियों ने पहले दिन तीन सौ से अधिक पोस्ट कार्ड लिखे।

प्रधानमंत्री तक पहुंचाई आवाजनैनवां के कॉलेज को सरकारी कराने की मांग भाजपा के तहसील महामंत्री दीक्षंात सोनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एप पर भी की है। एप पर लिखा है कि नैनवां में 15 वर्ष पूर्व 21 जुलाई 2003 को स्ववित्तपोष महाविद्यालय खोला गया था।

महाविद्यालय आज भी सरकारी दर्जा प्राप्त करने से अछूता रह रहा है, जबकि हिण्डोली-नैनवां महाविद्यालय में एक भी सरकारी कॉलेज नहीं है। नैनवां क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए 26 जुलाई 2013 में राज्याधीन करते हुए सरकारी कॉलेज घोषित कर दिया था तथा महाविद्यालय की चल व अचल सम्पति राज्याधीन भी कर ली थी।

13 माह बाद ही राज्याधीन किए कॉलेज को 26 सितम्बर 2014 को वापस स्ववित्त पोषी कर युवाओं पर कुठाराधात कर दिया, जबकि महाविद्यालय के लिए पर्याप्त भवन, भूमि व अन्य संसाधन उपलब्ध है। कॉलेज को सरकारी दर्जा दिलाकर क्षेत्र के लोगों को न्याय दिलाया जाए।