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300 दुकानों का धंधा चौपट, सुनवाई नहीं, बाजार बंद करना मजबूरी

शहर में लगातार हो रही बारिश व नवल सागर से छोड़े जा रहे पानी की निकासी से आमजन के साथ दुकानदार खासे परेशान है। ऐसे में बोहरा मोहल्ला से मीरागेट के व्यापारियों का धंधा पूरी तरह से चौपट हो गया है। यह अभी की नहीं हर साल की पीड़ा यहां के रहने वाले बाशिदों के साथ दुकानदारों की बनी हुई है।

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300 दुकानों का धंधा चौपट, सुनवाई नहीं, बाजार बंद करना मजबूरी

बूंदी. नवलसागर के गेट खोलने के बाद बाजार में बहता पानी।

बूंदी. शहर में लगातार हो रही बारिश व नवल सागर से छोड़े जा रहे पानी की निकासी से आमजन के साथ दुकानदार खासे परेशान है। ऐसे में बोहरा मोहल्ला से मीरागेट के व्यापारियों का धंधा पूरी तरह से चौपट हो गया है। यह अभी की नहीं हर साल की पीड़ा यहां के रहने वाले बाशिदों के साथ दुकानदारों की बनी हुई है। क्योंकि इसके निस्तारण के लिए ना तो प्रशासन के पास कोई उपाय है और ना ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था। जबकि इस मार्ग के दोनों छोर में करीब 300 दुकानों के अलावा मकान है। परकोटे की बूंदी, चूड़ी बाजार, कागजी देवरा व नागदी में जाने का मार्ग है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी है। लगातार बह रहे पानी से लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस मार्ग में कई मंदिर भी है। गणेश चतुर्थी से अंनत चतुर्दशी तक पहली बार मौका होगा जब लगातर 10 दिनों तक नागदी बही हो। ऐसे में कई दुकानदार अब यहां से पलायन करने की योजना में लगे हुए है।

प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
इधर, अलोह धातु व्यापार संघ के सदस्यों ने नवलसागर तालाब से निकलते गंदे पानी से निजात दिलाने की जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर मांग की है। व्यापार संघ के सदस्य योगेश कसेरा व विनय कसेरा ने बताया कि ज्ञापन में बताया कि तिलक चौक, सदर बाजार, बर्तन बाजार, नागदी बाजार में लगातार बह रहे गंदे पानी से लोगो को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समूचे मार्केट में गंदगी अटी पड़ी। ऐसे में नालियों से बहते पानी से निजात दिलाया जाए, जिससे व्यापारियों का धंधा चौपट न हो।

सरकार मास्टर प्लान लाए तो हो सकता है समाधान
राजेश शेरगढिय़ा, गौरव भडक़त्या, नीतिन सोनी व अंकुर जैन ने बताया कि नवल सागर झील के दरवाजे से मीरा गेट तक अगर अंडर ग्राउंड बड़ा नाला बनाया जाए तो काफी हद तक समस्या का हल हो सकता हैं। मास्टर प्लान बने तो इसका समाधान हो सकता है।

नगर परिषद की मनमर्जी
नवलसागर से पानी छोडऩे के मामले में नगर परिषद की मनमर्जी दुकानदारों पर भारी पड़ रही है। कभी यहां मुनादी करवा दी जाती है तो कभी नहीं करवाई जाती है। ऐसे में नागदी में पानी आने के बारे में पता नहीं चल पाता है। तथा दुकानदारों को नुकसान होता है। दुकानदारों का कहना है कि रात्रि 11 से सुबह 5 बजे तक पानी छोड़े जाने पर दिन में बाजार चल सकता है, लेकिन परिषद के कर्मचारियों द्वारा दिन में पानी छोड़ा जा रहा है।गत वर्ष अगस्त में हुई बारिश से एक माह तक कामकाज ठप हुआ था, जिससे व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

पुरानी है समस्या, निराकरण जरुरी
नवल सागर तालाब से निकलने वाले पानी की समस्या से तीन माह बारिश के दिनों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के समय इस मार्ग से शहरवासियों को जाना दुभर हो जाता है। रोड पर निकलने वाले गंदे पानी के छींटे वाहनों की स्पीड के साथ दुकानों के अंदर तक पहुंच जाते है। दुकानदार जगदीश लढ्ढा, अंतिम सेन व मंयक बाकलीवाल ने बताया कि दुकानों के सामने गंदगी रहती है। पैदल चलने वाले लोग मंदिर जाने वाले कई बार गंदे पानी से छिटक जाते है गिर जाते हैं चोटिल हो जाते है। बिना समय के झील से पानी की निकासी कर दी जाती है जिससे कई बार तो दुकानों के अंदर पानी चला जाता है। व्यापारियों के काम धंधे लगातार बहते पानी से ठप पड़े हैं। कहीं कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। यहीं नहीं रात के समय कब पानी छोड दे, ऐसे में लोग अपने वाहन घर के बाहर खड़ा करने से डरते है।


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