
बूंदी. उम्मीदों की बोझ की गठरी उठाएं जब बच्चे पालकों की उम्मीदोंं पर खरा नही उतर पाते तो गलत कदम उठा लेते है। ऐसे में अब परिजनों के लिए परीक्षा की घड़ी शुरू हो गई है। जी हां शिक्षा बोर्ड राजस्थान का सीनियर सैकंडरी विज्ञान और वाणिज्य का परिणाम बुधवार शाम घोषित होने के साथ ही बच्चों में बेचेनी बनी है, तो कई जगह उत्सुकता का माहौल देखा जा रहा है।
वहीं कला वर्ग का परिणाम भी जल्द आने वाला है। इसको लकर कहीं खुशी छाई है ओर आने वाले कल को लेकर बच्चे तैयार है लेकिन जिन बच्चों का रिजल्ट खराब होने की आशंका है वहां अभी से ही अभिभावकों की अपने बच्चों के प्रति व्यवहार में बदलाव लाना होगा।
दोस्त बने अभिभावक-
परिजन अपने बच्चो को रिजल्ट से पहले ही अपने विश्वास में लेना शुरू कर दें। उन्हें विश्वास दिलवाएं परिणाम केसा भी हो, चिंता की जरूरत नहीं। अच्छे नतीजे न आए तो आगे बेहतर तैयारी करें। ओर मंजिल की ओर बढ़ जाए उनका बातचित के दौरान हौसला बढ़ाए।
असफलता से हारे नही-
आने वाले रिजल्ट में तुम्हारी अपेक्षा से कम अंक भी आए तो मत भूलना... मार्कशीट..महज एक कागज का टुकड़ा है। मगर...तुम किसी के दिल के टुकडें हों... यह कहना है कि शिक्षिका रेहाना चिश्ती का।
परिणाम सामने आने के साथ ही स्कूलों में पोस्टर ओर सोशल मिडिया के जरिए बच्चों को मोटिवेशन कॉटेशन लिखकर जागरूक किया जा रहा है। वे खुद बच्चों की काउसलिंग के साथ अभिभावकों को भी प्रेरित कर रही है।
बच्चों का मनोबल बढ़ाए-
बच्चे के व्यवहार में रिजल्ट जारी होने के साथ ही बदलाव नजर आए तो इसे अनदेखी न करें। बच्चा अगर मजाक में भी रिजल्ट खराब आने के बाद घर से बाहर जाने की कहें तो उसके समझाएं। जिला शिक्षा अधिकारी तेजकवर ने बताया की रिजल्ट आने के बाद विद्यार्थी यह नही सोचे की अच्छा मोका गया। अभी ओर मोके है जिदंगी में।
बच्चों को समझाएं
पालक बच्चों को प्रोत्साहित करें की अभी उनके पास ओर भी मोके है। 10वीं 12वी कॅरियर का अंत नही है। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चंद्र प्रकाश राठौर का कहना है की बच्चों को साहस के साथ किसी भी चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करें।
Published on:
23 May 2018 06:20 pm
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