16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

संस्कृत स्कूल के हाल तो देखो ‘सरकार’

राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय की पड़ताल में चौंका देने वाली स्थिति सामने आई।

2 min read
Google source verification
Congress attacks BJP in bundi mera booth mera gaurav program

गहलोत और पायलेट ने आरोपों की उड़ान भरी... कहा घमंड में चूर है सरकार

बूंदी. संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग ने अलग से संस्कृत स्कूल तो खोल दिए, लेकिन इन स्कूलों में व्यवस्थाओं की कभी सुध नहीं ली जा रही। बूंदी शहर के इंद्रा कॉलोनी राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय को बतौर बानगी देखें तो यही हाल है।

संस्कृत साहित्य विषय में जहां एक छात्रा पर एक शिक्षक तैनात है, वहीं इसी स्कूल में वांगमय विषय के लिए वर्षों से कोई अध्यापक ही नहीं। राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय की पड़ताल की तो चौंका देने वाली स्थिति सामने आई। दरअसल संस्कृत साहित्य विषय में नामांकन शून्य होने के बावजूद भी यहां पर विभाग ने एक शिक्षक को नियुक्त कर रखा है।


विद्यालय की स्थापना वर्ष 1953 में हुई। प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में 1976 में हुआ, फिर 2000 से माध्यमिक प्रवेशिका और 2013 में प्रवेशिका से वरिष्ठ उपाध्याय होने के बाद से यहां साहित्य संस्कृत विषय में मात्र एक ही विद्यार्थी अध्ययनरत है, जिस पर सरकार ने एक व्याख्याता की नियुक्ति कर रखी है।

2013 से प्रवेशिका से यह स्कूल वरिष्ठ उपाध्याय हुआ तभी से संस्कृत साहित्य विषय में विद्यार्थियों का नामांकन इक्का-दुक्का ही रहा। हाल यह है कि इस विषय में एक छात्रा पर एक फस्र्ट लेवल ग्रेड शिक्षक की नियुक्ति कर रखी है जिस पर सरकार लाखों रुपयों की पगार दे रही है।

सूत्रों के अनुसार संस्कृत साहित्य विषय के अध्यापक छोटूलाल शर्मा विद्यालय में पिछले 6 साल से है। यही नहीं इस विद्यालय में वांगमय विषय के लिए कोई अध्यापक नियुक्त नहीं है, जबकि यह विषय हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है। इस स्कूल में शिक्षा विभाग ने एक प्राचार्य सहित 13 व्याख्यताओंं की नियुक्ति कर रखी है।


प्राचार्य की माने तो उच्च अधिकारियों को प्रत्येक माह रिपोर्ट भेजकर अवगत करवाया जाता है, लेकिन अभी तक इस मामले में विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब अपने चेहेतों को लाभ दिलाने की बात हो या कुछ ओर लेकिन सरकार को इस स्कूल से सालाना 9 लाख से भी अधिक का चूना लग रहा है।


& गत वर्ष से लगातार साहित्य विषय के छात्रों की संख्या न के बराबर है। वर्तमान में एक ही छात्रा अध्ययन कर रही है। ऐसे में अध्यापक की कोई उपयोगिता नहीं है। शिक्षा निदेशक को कई बार पत्र लिखकर अवगत करवा दिया है। विद्यालय में वर्षों से वांगमय और सामाजिक व शारीरिक शिक्षक की मांग की जा रही है।
वेदप्रकाश, प्राचार्य, राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय