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बूंदी

सरकारी आवासों में खौफ के साये में जीना हुआ मुश्किल

जिधर देखो उधर गंदगी। जगह-जगह भरा पानी और उसमें पनपते मच्छर।

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बूंदी

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pankaj joshi

Oct 17, 2018

बूंदी. जिधर देखो उधर गंदगी। जगह-जगह भरा पानी और उसमें पनपते मच्छर। बंदरों का आतंक और घरों के आस-पास घूमते पाटागोह, सांप और बिच्छु। घरों की दीवारें भी सीलन से जर्जर हो गई। यह हाल किसी बस्ती के नहीं बल्कि जिला मुख्यालय पर ही सरकारी आवासों के हैं। जी हां! गायत्री नगर स्थित सरकारी कॉलोनी में बने घरों में रहना मुश्किल हो गया है।
इन आवासों में रहने वाले बाशिंदों का हर पल गुजरना किसी मजबूरी से कम नहीं। शाम ७ बजे बाद बाशिंदे घरों में कैद हो जाते हैं। गुप अंधेरे के कारण घर से बाहर निकलना किसी खतरे से कम नहीं होता। पेड़ों पर लटकते सांप, सड़कों पर बैठे बंदरों के झुड और अंधेरे के बीच पाटागोह यहां लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं। बच्चों में हर वक्त भय बना रहने लगा है।जहरीले कीड़े और जमा गंदगी के कारण यहां कोई भी शाम ढलने के बाद बच्चों को बाहर नहीं निकलने देता।
पेट्रोल चोर सक्रिय
कॉलोनी में अंधेरा रहने से पेट्रोल चोरी की वारदातें थम नहीं रही। यहां रात के अंधेरे में बाहर खड़े वाली बाइक से पेट्रोल निकालना आम हो गया है। इसकी कई बार यहां के बाशिंदे पुलिस को भी शिकायत कर चुके। कॉलोनी में रहने वाली सुनीता शर्मा ने बताया कि यहां समाज कंटकों का आना बंदहोना चाहिए।
रोड लाइट जले बीते कई माह
कॉलोनी में बसे हुए लोगों को २५ वर्ष हो गए। यहां ३० आवास बने हुए हैं। इन वर्षों में मात्र एक ही बार सड़क का निर्माण हुआ। जो अब जर्जर हो गई। कई जगहों से उधड़ गई। इस सड़क पर आए दिन वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
चौकीदार लगे, सफाई बेहतर हो
कॉलोनी में सफाई के हाल किसी से छिपे हुए नहीं हैं। यहां घरों से पानी की निकासी के उचित प्रबंध नहीं किए हुए। ऐसे में अब पानी घरों के आस-पास ही जमा रहने लगा है। यहां चौकीदार लगाने और बेहतर सफाई की मांग पहले भी कई मर्तबा उठा चुके हैं। कॉलोनी में बिजली के तार झूल रहे हैं। जो पोल क्षतिग्रस्त हो चुके उन्हें भी नहीं हटाया गया।
घरों में कैद बच्चे, खेलना भी दुश्वार
कॉलोनी में जहरीले कीड़ों के कारण बच्चे बाहर नहीं खेल पाते। बच्चे शाम के समय घर से अकेले नहीं निकल सकते।
चारों तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है। घरों में बीमारियां पनप रही है। बंदरों का आतंक कम नहीं है। सांप-बिच्छू का २४ घंटे डर बना रहता है। ऐसा लगता है जैसे किसी चिडिय़ाघर में रह रहे हो।
अन्नपूर्णा चतुर्वेदी, गृहिणी
मकान जर्जर हो गए। हालात ऐसी हो रही है कि कभी भी गिर सकते हंै। घरों के अंदर सांप घुस जाते हैं। रोड लाइट नहीं होने से समस्या बनी हुई है। यह तो सरकारी आवासों के हाल है।
सावित्री हाड़ा, गृहिणी
कॉलोनी में बच्चों के खेलने की कोई सुविधा नहीं है। सड़क देखे अरसा बीत गया। नील गाय, गाय-बैल के साथ बंदरों का आतंक है। झांड़-झंखाड़ हटना चाहिए। साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।
पुष्पादेवी, गृहिणी
कॉलोनी में रोडलाइट नहीं जलने से अंधेरे में रहना मजबूरी बना हुआ है। बच्चों को शाम के वक्त कोई बाहर नहीं निकलने देता। रात के समय चोरियों का भय बना रहता है। कई लोग कॉलोनी छोड़कर चले गए हैं।
नंदादेवी, गृहिणी
कॉलोनी में बसे आवासों की कई वर्षों से मरम्मत नहीं हुई। सीलन से कई घर जर्जर हो गए।कई मकानों के छज्जे गिर चुके। जिनकी भी मरम्मत नहीं करा रहे। बच्चे अकेले घरों में नहीं रह सकते।
सुनील मीणा, निवासी