
थमे रहे रोडवेज के पहिए, सड़कों पर बेबस यात्री
अधिकारियों ने भी दिया समर्थन, हरियाणा रोडवेज भी समर्थन में थमी
बूंदी. चुनावी मौसम है, ऐसे में सरकारी कर्मचारी सरकार द्वारा किए गए वादें जो अब तक पूरे नहीं हुए उन सभी को याद दिलाने के लिए मैदान में हैं। पहले रोडवेज फिर राज्य कर्मचारी के बाद अब राजस्थान कानूनगो संघ ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
रोडवेज में २७ जुलाई के समझौते को लागू करवाने के लिए गुरुवार को ११वें दिन भी बसों के चक्के जाम रहें। कर्मचारियों के समर्थन में अधिकारियों ने भी समर्थन देते हुए सरकार की वादाखिलाफी के प्रति रोष जताया। हरियाणा रोडवेज भी गुरुवार से हड़ताल पर चली गई। ऐसे में यात्रियों की परेशानी अब और बढ़ गई है। कर्मचारियों ने बस स्टैंड परिसर में धरने प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखा। कर्मचारी अपनी जायज मांगों पर अड़े हैं, इधर सरकार मुंह फेरे हुई है। रोडवेज के इतिहास में दूसरी बार हो रही है लंबी हड़ताल से यात्री बेहाल है।
रोडवेज के पुराने कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष १९९० में भैंरोसिंह शेखावत की सरकार के समय भी रोडवेज कर्मी पुराने समझौते को लागू करने की मांग पर करीब ७२ दिन हड़ताल पर थे। कर्मचारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की लड़ाई को लेकर ही चक्काजाम हड़ताल की जा रही है। कर्मचारी सरकार के आगे न पहले झुका था और न अब झुकेगा।
वहीं राजस्थान राजस्व सेवा परिषद के आह्वान पर राजस्व विभाग के समस्त कार्मिक शुक्रवार को सामूहिक अवकाश पर रहकर २८ अप्रेल २०१८ को हुए लिखित समझौते की राज्य सरकार से पालना न करने के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। राजस्थान कानूनगो संघ अध्यक्ष बलवीर सिंह ने बताया कि सरकार ने अगर मांगें नहीं मानी तो आगामी १ अक्टूबर से सामूहिक अवकाश जारी रहेगी।
इधर, दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।
जयपुर में महापड़ाव जारी रहा
राज्य कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जयपुर में महापड़ाव डाल रखा है। बूंदी जिले से भी बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल है। सरकारी कार्यलयों में कर्मचारियों की हड़ताल का असर साफ देखने को मिल रहा है। हड़ताल के चलते सरकारी दफ्तर खाली है, लोग परेशान।
Published on:
28 Sept 2018 11:26 am
