
नोताडा. अतिवृष्टी व बाढ़ के हालातों के बाद विद्युत आपूर्ति बाधित होने से फसल निकालने का थ्रेसर चलाकर हवा में बैठी बुजुर्ग महिलाएं
नोताडा. क्षेत्र के लोगों पर 22 अगस्त की रात्रि कहर बनकर गुजरी, जिसने लोगों का सुख-चैन छिन लिया। रात्रि को दस बजे से तेज बरसात का दौर शुरू हुआ जो एक बजे तक चला। लोगों ने सुबह उठकर देखा तो चारों ओर पानी ही पानी नजर आया। धीरे धीरे पानी कम हुआ लोग अपने को व्यवस्थित करने में जुटे हुए हैं, लेकिन इसी बीच विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं होने से लोगों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है।
बरसात में विद्युत पोल, लाइनें, ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने के चलते नोताडा, घाट का बराना, खरायता पापड़ी व गेण्डोली फीडरों तक पहुंचने वाली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे इन फीडरो से जुड़े करीब पचास गांवों की विद्युत आपूर्ति पिछले सात दिनों से बंद पड़ी हुई है। पहले तो तीन दिनों तक लगातार बरसात से कार्मिक काम नहीं कर पाए, फिर मेज नदी के उफान के चलते दो दिन का समय निकल गया। मंगलवार को पानी उतरा और बुधवार से विद्युतकर्मी वापस लाइनों को दुरुस्त करने और बिजली आपूर्ति सुचारू करने के लिए जुट हुए है।
सात दिन से बंद पड़ी विद्युत आपूर्ति के चलते लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंधेरे में रात गुजारना, मच्छरों का आतंक, पानी की समस्या, आटा पिसवाने, मोबाइल चार्ज करने जैसी अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर आक्रोशित ग्रामीण बुधवार को घाट का बराना मेगा हाइवे व झालीजी का बराना में धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं, जिसके बाद गुरुवार को गेण्डोली व झालीजी का बराना फीडर की आपूर्ति इलेवन केवी की लाइन डालकर चालु कर दी, लेकिन अभी अन्य फीडरों से जुड़े गांवों की आपुर्ति बहाल नहीं हो पाई
तेल के दिए बने सहारा
लोगों ने बताया कि रात्रि के समय उजाले के लिए रूई की बाति बनाकर उसमें मीठा तेल डालकर उजाला कर रहे हैं। इन्वर्टर, मोबाइल चार्ज करे जा रहे बाहर है। ग्रामीणों ने बताया लाइट नहीं आने से घरों के इन्वर्टर व मोबाइल चार्ज करने के लिए पास के गांव सात किमी दूर बाझडली जाना पड़ रहा है। या फिर छह रुपए प्रति घंटा व दो लीटर तेल में जनरेटर लगवाकर इन्वर्टर चार्ज कर रहे हैं और मोटर चलाकर पानी भर रहे हैं।
अस्पताल में चला रहे जनरेटर
देईखेडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड में भर्ती मरीज, ओपीडी में दिखाने वालो को गर्मी से हाल बेहाल है। सोनोग्राफी, एक्स रे जांच मशीन लाइट के अभाव में नहीं चल पा रही है। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. नरेन्द्र गुर्जर ने बताया कि वैक्सीन को बचाने के लिए जरनेटर चलाया जा रहा है। भुसा जला कर धुंआ कर
रात को मच्छरों का प्रकोप कम करने के लिए। कंडे जलाकर उन पर भुस्सा डालकर धुंआ कर रहे हैं। पचीपला गांव में ट्रैक्टर से फसल निकालने के थ्रेसर को चलाकर एक परिवार उसकी हवा में बैठकर राहत पाने का जतन करता नजर आए।
गेहूं पिसवाने कापरेन जा रहे
ग्रामीणों ने बताया की कई लोगों के घरों में आटा खत्म हो गया। गेहूं पिसवाने के लिए लाइट के अभाव में गांव में चक्की बंद पड़ी है। ऐसे में 15 किमी दुर कापरेन जाकर पिसवाना पड़ रहा है।
Published on:
29 Aug 2025 05:26 pm
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