
बुरहानपुर। जब 40 साल बाद अपने काका को जिंदा देखा तो खुशी के मारे आंख से आंसू नहीं थम रहे थे। परिवार को यकीन ही नहीं हो रहा था कि काका जिंदा हैं। जब आमना-सामना हुआ तो खूब रोए। उनके आंसू थम नहीं रहे थे। यह खुशी के आंसू थे। यह नजारा जिसने भी देखा वो भी भावुक हो गया। यह कहानी है एक बुजुर्ग की, जो 40 साल पहले परिवार से बिछड़कर बुरहानपुर आ गया था। सिमांचल भरत महापात्र नाम के यह बुजुर्ग भुवनेश्वर के पास छोटे से टिकरपाड़ा कस्बे के निवासी हैं। बुधवार को यह बुजुर्ग अपने परिवार के साथ रवाना हो गए। जाते-जाते कहा- अलविदा।
लंबे समय से बुरहानपुर में दिन काट रहे सिमांचल को रोटी बैंक ने मिलाने का काम किया। मिलन की कड़ी उस समय जुड़ने लगी थी, जब 29 जून को कपड़ा व्यापारी ओमप्रकाश सोनी और देवकीनंदन सोनी अपनी स्वर्गीय बहन लक्ष्मीदेवी झवर निवासी कटक उड़ीसा की स्मृति में रोटी बैंक को एक दिन का भोजन खर्च दान देने पहुंचे थे। तब उन्हें इस बुजुर्ग की पूरी कहानी सुनने को मिली। तब सोनी ने तुरंत उनके भांजे कमल राठी जो टिकरपाड़ा से 150 किलोमीटर दूर रहते हैं और समाज सेवी भी हैं उनको यह मामला बताया। राठी ने उनके जिले के पुलिस विभाग की मदद लेकर इस बुजुर्ग के भाई का घर ढूंढ निकाला।
समाजसेवियों ने भी दिल लूटा दिया
बुजुर्ग की व्यथा सुन बुरहानपुर के समाजसेवियों ने भी दिल लुटा दिया। बुजुर्ग की सेवा में कोई कमी नहीं रखी। परिवार को उड़ीसा से बुरहानपुर बुलाया, तो उनका रिजर्वेशन टिकट आने जाने का बुजुर्ग सहित कराया। महेश्वरी समाज ने दस हजार रुपए नकद, किशोर वाणी ने तीन हजार रुपए और मोबाइल, कपड़े मिठाई, नमकीन और प्रशासन की तरफ से वॉकर, स्टीक प्रदान की। परिवार वालों के मिलन का वह पल सभी की जहन में हमेशा के लिए उतर गया। बुधवार को बुजुर्ग अपने परिवार के साथ रवाना हुआ। उसके पहले मौजूद एसडीएम काशीराम बड़ोले ने लेने आए भतीजों से वीडियो कॉल पर बुजुर्ग के परिवार से भी बात करवाई इस बात से संतुष्ठ हो जाए की वह बुजुर्ग का परिवार वही है। वीडियो कॉल पर बुजुर्ग ने सभी को पहचाना।
Updated on:
14 Jul 2021 02:19 pm
Published on:
14 Jul 2021 01:59 pm
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