
Asirgarh Fort News
बुरहानपुर. शहर को प्राचीन नगरी के रूप में पहचान रही है। बुरहानपुर में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं जिसके कारण पर्यटन का विकास हो सकता है। हालांकि स्थिति ये है कि पर्यटन सर्कल में बुरहानपुर का नाम तक नहीं है। कई सालों से खंडहर हो रही धरोहरों का विकास नहीं हो रहा है।
जोखिम भरा है आसीरगढ़ का रास्ता
बुरहानपुर से लगभग 20 किमी दूर सतपुड़ा पहाड़ के शिखर पर समुद्र सतह से 750 फीट की ऊंचाई पर आसीरगढ़ किला बना हुआ है। यह किला आज भी अपने वैभवशाली अतीत का कहानी बयान कर रहा है, लेकिन यहां का जोखिम भरा रास्ता पर्यटकों को किले तक जाने से रोक रहा है। आधा रास्ता बनाने के बाद केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगे की सड़क की सुध नहीं ली। पहाड़ी पर सिंगल रास्ता होने से गिरने का डर बना रहता है। यहां अब तक रैलिंग तक नहीं लगाई गई। यहां लगातार पहाड़ों से बड़े पत्थर भी गिरते रहते हैं।
पर्यटकों की सुविधा के लिए अब तक मात्र पर्यटन चौकी बुरहानपुर में खुली है। इसके अलावा कोई नया काम नहीं हुआ। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए खड़कोद में मिनी एयरपोर्ट का प्रस्ताव पिछले 10 साल से अटका पड़ा है। कुछ समय पूर्व 48 करोड़ की सड़कों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, इसे भी अब तक कोई हरी झंडी नहीं मिली है। पुरातत्वविद् होशंग हवलदार कहते हैं कि किले के साथ ही अन्य कई स्थल हैं जिनका विकास किया जा सकता है। ताप्ती पर स्टॉप डैम बनाने से हमारे यहां वोटिंग हो सकती है। शिकारे चल सकते हैं। ताप्ती के पौराणिक महत्व को उभारना जरूरी है।
Published on:
06 Feb 2020 11:12 pm
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