
Burhanpur: Asghargarh was of great importance in the revolution of 1857
खंडवा/बुरहानपुर. पंजाब के तीन क्रांतिकारियों को जमीन से हजार फीट की ऊंचाई पर सजा-ए-मौत दी थी। यानी सन 1857 की क्रांति में बुरहानपुर के असीरगढ़ के किला का बहुत महत्व था। क्योंकि अंग्रेजों ने यहां देशभर से पकड़े गए और सजा सुनाने के बाद क्रांतिकारियों को बंदी बनाकर रखा था।
ये हैं शहीद जिन्हें लटकाया था फांसी पर...
अजय व अभेद किला स्वतंत्रता संग्राम का गवाह है। क्योंकिं यहां पंजाब लुधियाना के तीन क्रांतिकारी रूरसिंह, पहाड़सिंह व मुलुकसिंह को आसीरगढ़ किले में बंदी बनाकर रखा था। तीन साल पहले नामदारी ट्रस्ट ने अपने शहीदों की स्मृति में किले में सूचना पट्टीका और उनका बलिदान लिखने की अनुमति मांगी थी।
अंग्रेजों के 1857 के दस्तावेज है मौजूद
भारतीय पुरातत्व विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों में तीनों क्रांतिकारियों के फांसी के पहले के मेडिकल सर्टिफिकेट और फांसी देने के बाद रिपोर्ट जो कोर्ट में पेश की थी। जिसके प्रमाण के तौर पर परिजन और 10 लोगों का दल बुरहानपुर आया था। लेकिन केंद्रीय मामला होने के कारण सूचना और इतिहास की जानकारी देने का बोर्ड नहीं लग सका।
किले की खुदाई में निकली है जेल
बुरहानपुर जिले से 20 किमी दूर असीरगढ़ किले की खुदाई में जेल निकली है। ये जेल अंग्रेजों ने बनाई थी। किले में ही अंग्रेजांे का कब्रिस्तान भी है। खुदाई में निकली जेल में 4 बैरक है। वहीं रानी का एक महल भी निकला है। इस जेल में आजादी के दिवानों को रखा गया था। जिन्हें सजा-ए-मौत दी गई थी वे पंजाब के कूमा जाति के थे।
ये असीरगढ़ किले का रहस्य...
असीरगढ़ मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित एक गांव है। असीरगढ का ऐतिहासिक क़िला बहुत प्रसिद्ध है। असीरगढ़ क़िला बुरहानपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में सतपुड़ा पहाड़ियों के शिखर पर समुद्र सतह से 750 फ़ुट की ऊँचाई पर स्थित है। यह क़िला आज भी अपने वैभवशाली अतीत की गुणगाथा का गान मुक्त कंठ से कर रहा है। इसकी तत्कालीन अपराजेयता स्वयं सिद्ध होती है। इसकी गणना विश्व विख्यात उन गिने चुने क़िलों में होती है, जो दुर्भेद और अजेय, माने जाते थे।
Published on:
14 Aug 2017 07:11 pm
